एक दिव्यांग ऐसा भी जो 80 से 100 किलोमीटर साइकिल चला ब्रेड बेचकर कर रहा है जीवन यापन, काम के दौरान करंट लगने से खोया था अपना हाथ।

धमतरी — आज के आधुनिक दौर में हर इंसान अपने जीवन यापन करने के लिए अनेकों काम करते हैं जिससे उनका घर परिवार अच्छे से चल सके। मगर अगर एक व्यक्ति जो अपने कार्य के दौरान घायल होने के बाद अपना सीधा हाथ ही इस घटना में खो दे तो उसका परिवार परिवार का क्या होगा। जो कि अकेले ही अपने घर का कमाने वाला व्यक्ति है ।जिससे उनकी चार जिंदगियां चलती है। ऐसे ही एक व्यक्ति है जो कुरूद के बगदेही ग्राम में निवास करते हैं ,जो पहले राजमिस्त्री का काम करते थे ।2005 में काम के दौरान अचानक करंट लगने से उन्होंने अपना हाथ को दिया।

हाथ खोने के बाद परिवार को जीवन यापन के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ा उसे परिवार में एक पत्नी जिसका तबीयत खराब रहता ही है ,वही दो बच्चे जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं और वह पिता जिसने अपना हाथ खोया जो घर का सर्वहारा था। जिसका नाम त्रिलोक कुमार साहू 40 वर्षीय जिनकी पत्नी महेश्वरी साहू ,दो बेटे हैं एक 14 साल का एक 12 साल का छोटा लड़का सातवीं क्लास में पढ़ता है वही बड़ा लड़का नवी क्लास पर है अब त्रिलोक कुमार को जीवन यापन करने के लिए बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, जिसे देखते हुए त्रिलोक कुमार ने ब्रेड का धंधा शुरू करने अपने दिमाग में सोच और उसके बाद से आज 4 सालों तक लगातार कुरुद धमतरी शहर के हर ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर सुबह से लेकर शाम तक ब्रेड बेचकर अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं। मगर एक हाथ नहीं होने के बावजूद वह साइकलिंग अच्छी तरीके से करते हैं, उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ा,क्योंकि इसकी आदत नहीं थी,कि किस तरह से मैं साइकिल को संभाल कर चला सकूं सड़कों पर वह गांव हो या शहर मगर उनके अंदर जो जज्बा था, उसके चलते उन्होंने आज 4 वर्ष हो गए।

लगातार अपने परिवार के पेट पालने के लिए रोज सुबह 5:30 से अपने घर से निकलकर रात 8:30 बजे तक घर पहुंचते हैं,ताकि अपने परिवार को पाल सके आगे चर्चा में उन्होंने यह बताया कि मैंने शासन प्रशासन से भी गुहार लगाई थी मगर अभी तक किसी ने मेरी नहीं सुनी ना अभी तक मुझे कोई सहयोग नहीं मिल पाया है। जिसका अभी तक मुझे मलाल है ।वही उनके धंधे के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि जैसा भी है,मुझे अपने घर का पेट पालना है मैं जब तक जिंदा हूं तब तक अपने परिवार को पालने के लिए काम करता रहूंगा ।