ऐसा कोई विषय नहीं जिसका मोदी जी को ज्ञान नहीं तथा दुनिया की ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका उनके पास समाधान नहीं-अशोक बजाज।

नवापारा राजिम :- जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ के संयोजक अशोक बजाज ने एक विज्ञप्ति में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के शतकीय एपिसोड का प्रसारण 30 अप्रेल को होगा जिसका सभी देशवासी बेसब्री से इंतजार कर रहें है. प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ सदैव शिक्षाप्रद व प्रेरणादायी होती हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ, योग, खेती-किसानी, धर्म-संस्कृति, कला व विज्ञान एवं खेल से जुड़े पहलुओं पर देशवासियों का मार्गदर्शन करते हुए सकारात्मक व विकासात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। वे नपे तुले शब्दों में सहज तरीके से मार्गदर्शन करते हैं।  मोदी का संवाद केवल भारत ही नही बल्कि सम्पूर्ण जगत के लिए उपयोगी होता है। यही वजह है कि यह कार्यक्रम लोकप्रियता के चरम तक पहुंच गया है, उनका संबोधन प्रायः देश, समाज व व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर होता है, उनकी चर्चा का विषय बड़ा व्यापक आता है, शायद ही कोई विषय ऐसा हो जो उनसे अछूता हो। अपने संवाद में वे सभी वर्गों व क्षेत्रों को समेट लेते हैं। मजे की बात तो यह है कि मन की बात में जिस व्यक्ति, क्षेत्र या विषय की चर्चा होती है वह तुरंत दुनिया भर में ट्रेंड हो जाता है,  बजाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में कहा कि ऐसा कोई विषय नहीं जिनका उन्हें ज्ञान नहीं तथा  दुनिया की ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका उनके पास समाधान नहीं। श्री बजाज ने कहा कि मन की बात के माध्यम से छत्तीसगढ़ के अनेक प्रसंग पूरे देश में चर्चित भी हुए और प्रेरणा भी बने, यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव करने वाली बात है। अपने पिछले एपिसोड में अब तक  मोदी  छत्तीसगढ़ के खेत खलिहान से लेकर राजधानी के कचरा महोत्सव तक का जिक्र कर सराहना कर चुके है.  मोदी ने 26 जुलाई 2015 को 10 वे एपिसोड में राजनांदगाव जिले के केसला गांव का उल्लेख किया तो पूरे छत्तीसगढ़ वासियों का सीना चौड़ा हो गया। हर जगह केसला गांव के लोगों की सोच और समझदारी की चर्चा होने लगी। इसी प्रकार उन्होंने 27 दिसंबर 2015 को 15 वी कड़ी में स्वामी विवेकानंद जी की जन्म- जयंती पर रायपुर में प्रस्तावित राष्ट्रीय युवा महोत्सव का जिक्र करते हुए देश भर के नवजवानों से सुझाव मांगें थे। श्री मोदी  ने  रायपुर नगर निगम के कचरा महोत्सव की जमकर तारीफ की थी और इसे अनूठा प्रयास निरूपित करते हुए कहा था वेस्ट मैनेजमेंट और स्वच्छता के महत्व को जिस अभिनव तरीक़े से इस महोत्सव में प्रदर्शित किया गया, इसके लिए रायपुर नगर निगम, पूरे छत्तीसगढ़ की जनता और वहां की सरकार और प्रशासन को मैं ढ़ेरों बधाइयाँ देता हूँ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर के बीजापुर में आई ई डी ब्लास्ट में शहीद सीआरपीएफ के स्निफर डॉग ‘क्रेकर’ उल्लेख करते हुए कहा था। ‘आत्मनिर्भर भारत, जब जन-मन का मन्त्र बन ही रहा है, तो कोई भी क्षेत्र इससे पीछे कैसे छूट सकता है |’  इसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी के दौरान देश की जनता की जिस प्रकार हौसला अफजाई की वह किसी से छुपी नहीं है। उन्होंने कोरोना  वारियर्स का हौसला भी डिगने नहीं दिया। उन्होंने रायपुर के डॉक्टर बी.आर. अम्बेडकर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में कार्यरत एक नर्स भावना ध्रुव से सीधे बात की थी। मुश्किल दौर में इस मोदी मन्त्र से देश भर के कोरोना  वारियर्स को एक प्रकार से  संजीवनी मिल गई। इसी प्रकार उन्होंने छत्तीसगढ़ के देऊर गाँव की महिलाओं द्वारा गाँव के चौक-चौराहों, सड़कों और मंदिरों की सफाई कार्य का जिक्र करते हुए सराहना की थी. श्री मोदी नारायणपुर बस्तर के ‘मावली मेले’ का भी उल्लेख मन की बात में कर चुके है. उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय  मिलेट्स वर्ष का जिक्र करते हुए कहा था। “अगर आपको छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जाने का मौका मिले तो यहाँ के ‘मिलेटस कैफे’ जरुर जाइएगा। कुछ ही महीने पहले शुरू हुए इस ‘मिलेटस कैफे’ में चीला, डोसा, मोमोस, पिज़्ज़ा और मंचूरियन जैसे आईटम खूब पॉपुलर हो रहे हैं।” आगे उन्होंने बिलासपुर में आठ प्रकार के मिलेट्स का आटा और उसके व्यंजन बनाने के काम में लगे के एफपीओ की जानकारी दी. इसी एपिसोड में उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय हमारी धरती, हमारी विरासत का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। देश और समाज के विकास में उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। उनके लिए काम करने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान, नई पीढ़ी को भी प्रेरित करेगा। इस वर्ष पद्म पुरस्कारों की गूँज उन इलाकों में भी सुनाई दे रही है, जो नक्सल प्रभावित हुआ करते थे। अपने प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गुमराह युवकों को सही राह दिखाने वालों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इसके लिए कांकेर में लकड़ी पर नक्काशी करने वाले अजय कुमार मंडावी और गढ़चिरौली के प्रसिद्द झाडीपट्टी रंगभूमि से जुड़े परशुराम कोमाजी खुणे को भी ये सम्मान मिला है। इसी प्रकार नॉर्थ-ईस्ट में अपनी संस्कृति के संरक्षण में जुटे रामकुईवांगबे निउमे, बिक्रम बहादुर जमातिया और करमा  वांगचु को भी सम्मानित किया गया है। स्मरण रहे कि इस समय देश भर में सामूहिक रूप से सुनने की परिपाटी चल रही हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक बजाज तो शुरूवाती दौर से ही इस कार्यक्रम को सामूहिक रूप से सुनते आ रहें हैं, या यूं कहें कि मन की बात को सामूहिक रूप से सुनने की परिपाटी रायपुर से ही प्रारंभ हुई थी। श्री बजाज रेडियो के पुराने प्रेमी हैं तथा वे छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ के संयोजक भी है। इस नाते अनेकों बार वे रेडियो श्रोताओं का सम्मेलन और गोष्ठियां भी कराते रहते हैं। उन्होंने ही रेडियो श्रोताओं के बीच बैठकर मन की बात सुनने की परम्परा डाली औंर बिना नागा किये उन्होंने मन की बात को सामूहिक रूप से सुनने का आयोजन किया। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जब-जब रेडियो और मन की बात की चर्चा होती है तब-तब अशोक बजाज का जिक्र स्वाभाविक रूप से होता हैं। बजाज ने मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सुनने के लिए वे हमेशा अलग-अलग स्थानों का चयन किया हैं। एक बार राजिम मेले मे त्रिवेणी संगम के पास ” मन की बात “ के श्रवण का कार्यक्रम आयोजित कर श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के बीच बैठ कर इस कार्यक्रम का श्रवण किया जिसे सभी लोगों ने सराहा था। इसी प्रकार उन्होंने चम्पेश्वर महादेव एवं महाप्रभुु वल्लभाचार्य की पावन नगरी चम्पारण में भी ’ मन की बात ‘ के सामूहिक श्रवण का आयोजन किया जिसमें भारी संख्या में लोग उपस्थित हुये थे। अप्रैल 2018 में जगन्नाथपुरी की यात्रा के दौरान समुद्र के किनारे उन्होंने अन्य सैलानियों के साथ प्रधानमंत्री का उद्बोधन सुना। उन्होंने रायपुर में तो प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को बकायदा ’चौपाल‘ लगती थी, जहाँ पर ‘मन की बात’ के श्रोताओं का जमावड़ा लग जाता था। आगंतुको में मित्रों व सहयोगियों के अलावा रेडियो एनाऊंसर एवं पत्रकार मित्र भी होते थे। उनमें से अधिकांश रेडियो के नियमित श्रोता होते थे जो रेडियो श्रोता संघ से जुड़े हुए है। महिलाएं भी बड़ी संख्या में आने लगी थी। परन्तु इस आयोजन पर काली छाया तब पड़ी जब कोरोना काल आया। इस कालखंड में लॉकडाउन के दौरान तथा कोविड-19 के प्रोटोकाल के कारण मन की बात का सामूहिक श्रवण संभव नहीं हो पाया। लोगों को अपने-अपने घरों में ही सुनकर संतोष करना पड़ा था। श्री बजाज ने उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता से अपील की कि 30 अप्रेल को सुबह 11 बजे पूरे उत्साह के साथ 100 वें एपिसोड का अवश्य श्रवण करे।