
प्रथम दिन से ही मंदिरों में घंटियों की झंकार दूर तक दे रही सुनाई
राजिम 22 मार्च। कमल क्षेत्र के प्रसिद्ध आदिशक्ति देवी मां महामाया मंदिर में इस बार 803 ज्योति कलश प्रचलित किए गए हैं। प्राचीन शीतला मंदिर 83 ज्योति कलश, देवी सत्ती मंदिर में 32 ज्योति कलश तथा चंडी मंदिर एक ज्योति कलश जले हैं। इनके अलावा कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर प्रांगण के द्वितीय गर्भवती में स्थित जगत जननी मां दुर्गा मंदिर में 35 ज्योति कलश प्रचलित किए गए हैं इसके अलावा ब्रह्मचारिणी दरबार, खंडोबा तुलजा भवानी के साथ ही भक्तों के द्वारा घरों में भी जोत जंवारा प्रज्वलित किया गया है।
मां महामाया शीतला प्रबंध समिति के अध्यक्ष लीलेश्वर यदु, उपाध्यक्ष नारायण साहू, सचिव फागु निषाद, वाल्मीकि धीवर राजू साहू, संरक्षक जितेंद्र सोनकर, लाला साहू, अशोक श्रीवास्तव, फगुवा निषाद, लखन निर्मलकर, अधिवक्ता महेश यादव, रामकुमार साहू, पवन सोनी, पुजारी बलदाऊ ठाकुर, पंडा गोपाल निषाद, पुनाराम निषाद, शत्रुघ्न निर्मलकर, पितांबर यादव, विक्की साहू, विमल निषाद, बल्लू निषाद, श्रवण साहू इत्यादि की उपस्थिति में मंदिर पुरोहित पंडित विजय शर्मा एवं अशोक शर्मा के द्वारा मंत्रोचार के साथ ही शुभ मुहूर्त पर दीप प्रज्वलित किया गया। ज्योति कलश जलते ही मां महामाया के जोरदार जयकारे होने लगे।
घंटियों की झंकार एवं शंख ध्वनि गुंजित हुआ जिससे पूरे माहौल में देवी भक्ति का आगाज हुआ। प्रथम दिन मां शैलपुत्री के रूप में पूजा अर्चना किया गया। बताया गया कि पूरे मंदिर परिसर पर सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है। भक्तों को किसी प्रकार की दिक्कत ना हो आने-जाने बाद दर्शन में कोई परेशानी ना हो इसलिए इस बार पूरा ख्याल रखा जा रहा है। दर्शनार्थियों के लिए प्रसाद की व्यवस्था है। पूर्व वर्ष लोहे के नांदी पर ज्योति जलाई जा रही थी लेकिन इस बार मिट्टी के कलश पर ज्योति कलश प्रचलित किया गया है इससे प्राकृतिक स्वरूप स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है और मां महामाया को प्राकृतिक वातावरण बहुत ही अच्छा लगता है।
प्रथम दिवस से सेवा गीत लगे गूंजने
प्रथम दिन से ही माता सेवा के गीत गुंजन लगे सेवक दल के द्वारा झांझ, मंजीरा, ढोलक, टासक, दफड़ा, मजीरा इत्यादि वाद्य यंत्रों के साथ माता की महिमा का गुणगान करते हुए सेवा गीत प्रस्तुत किया जा रहा है भक्तगण इन्हें सुनकर झूम रहे हैं और मां की भक्ति स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है।
एक ही गर्भगृह में दो देवियां विलक्षण उदाहरण
मां महामाया मंदिर अत्यंत प्राचीन है। कब से यहां प्रकट हुई है किसी को जानकारी नहीं है इस संबंध में पूछने पर बताया कि आदिकाल से माताजी यहां विद्यमान है। एक भक्त ने बताया कि पहले यही स्थल वन में तब्दील था जहां माता विकराल रूप में प्रकट हुई थी जिसे देख पाना आम आदमी के बस में नहीं था उसे देखते ही नजर ठहर नहीं पाती थी इससे चिंतित साधु संतों के कहने के मुताबिक माताजी का स्वरूप को ऊपर से बदला गया है। मां महामाया के फांसी देवी काली की प्रतिमा भी प्रगट हुई है। जानकारी के मुताबिक पूरी दुनिया में एक गर्भवती में एक देवी उपस्थित होते हैं लेकिन यहां दो देवियां एक विलक्षण उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। महामंडप में गणेश, भैरव बाबा, परिक्रमा पथ पर मावली माता, दंतेश्वरी देवी विराजमान है। मंदिर के सामने सिंह बैठे हुए हैं।
