
राजिम :- ग्रामीण अंचलों में आजकल महुआ बिनने के लिए लोग सुबह 4:00 बजे उठ जा रहे हैं और सबसे पहले घर से एक टोकरी लेकर अपने परिवार सहित सीधे महुआ पेड़ के नीचे खड़े हो जाते हैं वहां से एक-एक कर पेड़ से टूटकर गिरते हैं इन्हें इकट्ठा कर बाजारों या फिर गांव की सड़क के किनारे पसरा लगाकर बेचने के लिए बैठ रहे हैं। शहर से 25 किलोमीटर दूर खुटेरी गांव में अपने पिता एवं चाचा के साथ पहुंचे दो छोटे-छोटे बच्चे इनमें से एक चलना सीखा है दूसरा अच्छी तरह से बोल लेता है इन दोनों बच्चे जैसे ही पिताजी उठे, उनके साथ में उठ गए और अपनी मां से पिता के साथ जाने की जिद कर बैठे। पिता ने भी उन्हें अपने साथ में ले गए और यह दोनों छोटे बच्चे महुआ को पकड़कर टोकरी में उठाकर रख रहे हैं यह दृश्य देखते ही बन रही थी। बताना जरूरी है कि इस मौसम में महुआ की सुगंध से ग्रामीण अंचल सुगंधित होती है।
पोषक तत्व से भरपूर होते हैं महुआ
जानकारी के मुताबिक महुआ में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के साथ ही कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन और विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इतने पोषक तत्वों से भरे होने के कारण इसे खाने के बहुत फायदे हैं। जानकार इनके बेनिफिट बताते हैं कि स्पर्म काउंट बढ़ाने में असरकारक, नसों की कमजोरी को दूर करने में सहायक, हाइपरटेंशन से बचाव, सूखी खांसी का इलाज, एग्जिमा से बचाव, गठिया और सिर दर्द से बचाव, शरीर में दिलाए फुर्ती, गैस और एसिडिटी से राहत जैसे अनेक फायदे इनके बताए जाते हैं।
