राजिम :- तीन नदियों के संगम में स्थित पंचमुखी कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में सोमवार शिव का वार होने के कारण बड़ी संख्या में भीड़ बनी रही श्रद्धालु घर सुबह से ही पूजन पाठ एवं अनुष्ठान के लिए उपस्थित हुए। लोटा, बाल्टी, गिलास इत्यादि पात्र में अपनी सुविधानुसार शिवलिंग में जल अभिषेक करने के लिए पहुंचते रहे त्रिवेणी संगम से जल लेकर सीधे चलते हुए महादेव के प्रांगण में पहुंचे और अपने बारी का इंतजार करते रहे हर हर महादेव की जय हो होता रहा।
इस मौके पर शिवलिंग का अलौकिक शृंगार किया गया था। नीचे वेदी को मां पार्वती का स्वरूप माना जाता है। श्रद्धालुगण महामंडप से होकर दर्शन पूजन किए गर्भगृह तक जल ले जाने के लिए पाइप लगा दी गई है जिनके सहारे जल सीधे शिवलिंग पर जल अभिषेक करते हैं इनके साथ ही विल्व पत्र, धतूरा, केसरईया,कनेर, दूध, दही, शक्कर, घी, सुगंधित तेल इत्यादि सामग्री चढ़ाकर पूजन अर्चना किया गया। नंदी महाराज के भी आरती उतारे गए। उनके कानों में भक्तगण फुसफुसते रहे। नारद पुराण के अनुसार भोलेनाथ के अर्थ परिक्रमा करने का नियम है अतः श्रद्धालुओं ने अर्ध परिक्रमा किया और घंटियों की झंकार से पूरा संगम क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालु लक्ष्मण झूला के अलावा नदी मार्ग से होकर पहुंचे मंदिर माघी पुन्नी मेला 5 फरवरी से शुरू होकर 18 फरवरी तक लगातार चला इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े हुए थे। मेला समापन होने के बाद भी प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है और आज तो सोमवार होने के कारण लोग शिवजी के पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय एवं श्री शिवाय नमस्तुभयम मंत्र का जाप होता रहा। परिवार सहित लोग पहुंचकर पूजन अर्चन में तल्लीन रहे। रायपुर से पहुंचे सोनकर परिवार ने बताया कि महादेव के दर्शन करने के बाद हमें बहुत शांति का अनुभव हो रहा है। यहां आकर संगम में स्नान किए उसके बाद दर्शन पूजन किए हैं सचमुच में यह दिव्य धारा धाम है। इनकी जितनी भी तारीफ किया जाए कम है। यह धरा हरि और हर की है इसलिए हर की दर्शन हो गया है हरि का भी दर्शन करेंगे। सरायपाली से पहुंचे एक परिवार ने बताया कि हम लोग मेला में नहीं आ पाए लेकिन आ जा कर अपने आप को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। इसी तरह से स्थानीय एवं बाहर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गण उपस्थित होकर दर्शन पूजन का लाभ लिये। त्रेता युग में शिवलिंग की स्थापना देवी सीता ने किया था। कथानक के अनुसार त्रेता युग में वनवास काल के दौरान रामचंद्र लोमस ऋषि से मिलने उनके आश्रम पहुंचे थे तब चौमासा रुककर यहां उपस्थित आसुरी शक्तियों का समूल नाश किया था इस दौरान देवी सीता त्रिवेणी संगम में स्नान कर अपने कुल के आराध्य देव महादेव की पूजन करने के लिए उन्होंने रेत से शिवलिंग बनाया और जल अभिषेक किया। यही शिवलिंग कुलेश्वरनाथ महादेव के नाम से जगत प्रसिद्ध हुआ है। बताया जाता है कि रामायण काल के दोनों नायक रामचंद्र जी ने रामेश्वरम महादेव की स्थापना की तथा देवी सीता ने कुलेश्वर नाथ महादेव की स्थापना किया।
