विभागीय उदासीनता के चलते नवागांव एनीकट में पानी ना के बराबर।

राजिम :- नवागांव एनीकट में इन दिनों जलस्तर बिल्कुल कम हो गया है। लगातार गेट से पानी बहने के कारण यह स्थिति निर्मित हुई है। जल संसाधन विभाग चाहते तो इस पानी को रोक सकते थे लेकिन उन्होंने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। बताया जाता है कि इस एनीकेट का देखरेख जल संसाधन विभाग धमतरी के हवाले हैं। वही गेट खोलने और बंद करने के लिए अर्थराइज है। उनके उदासीनता के चलते जिस उद्देश्य के लिए सरकार ने एनीकट का निर्माण किया है उसकी पूर्ति नहीं हो पा रही हैं और आने वाले आगामी 4 महीने गर्मी के दिनों में जल संकट से जूझना पड़ेगा। आखिरकार राज्य सरकार करोड़ों रुपया खर्चा कर नवागांव एनीकट का निर्माण किया है ताकि गर्मी कि चार-पांच महीने लबालब पानी भरी रहे और एनीकट के आसपास बसे हुए लोगों को सुलभता के साथ पानी की उपलब्धता हो। बता देना जरूरी है कि एनीकट में पानी रहते तक भूजल स्तर बना रहता है लेकिन जैसे ही पानी कम हो जाते हैं धीरे-धीरे करके लेवल नीचे चला जाता है बोर मशीन भी जवाब देना शुरू कर देते हैं। इन दिनों छोटे मोनोब्लॉक मशीनें नहीं चल पा रही है कुएं से पानी आउट हो गए हैं बड़े बोर मशीन से ही पानी आ रही है। पीने के लिए नल की उपलब्धता के चलते पानी तो उपलब्ध हो रहे हैं लेकिन अन्य दिनचर्या के लिए जल संकट सुरसा की तरह मुंह खोल कर खड़ी हुई है जिनसे निपटने में बड़ी परेशानी होगी। उल्लेखनीय है कि नवागांव एनीकट के किनारे लाखों की जनसंख्या में लोग रहते हैं इनमें से प्रमुख रूप से राजिम शहर के अलावा आसपास के करीब दर्जनों गांव जो गरियाबंद जिला में आता है। गोबरा नवापारा शहर यह रायपुर जिले का नगर पालिका है। इनके अलावा धमतरी जिला के दर्जनभर से भी अधिक गांव लाभान्वित होते हैं। लाखों की जनसंख्या भी पार हो जाती है और इतनी महत्वपूर्ण एनीकट पर प्रशासन की उदासीनता उनके क्रियाकलाप पर सवालिया निशान लगाते हैं। नतीजा पानी फालतू बह जाता है और एनीकेट में नहाने लायक पानी नहीं रह पा रहे हैं। पानी का लेवल नीचे हो गया है इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। लोग चिल्ला रहे हैं सरकार ऐसे अधिकारियों को क्यों रखते हैं जो पानी को भी सुरक्षित नहीं रख पाते हैं पानी की कीमत गर्मी के दिनों में सबसे ज्यादा पता चलता है। एक – एक बूंद महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

माघी पुन्नी मेला में पुण्य स्नान के लिए इसी एनीकट से सप्लाई हुआ पानी पिछले 5 फरवरी से 18 फरवरी तक प्रदेश के प्रसिद्ध माघी पुन्नी मेला का आयोजन त्रिवेणी संगम पर किया गया। इसमें तीन प्रमुख पर्व हुए जिसमें पुण्य स्नान किया गया। महाशिवरात्रि पर देशभर से लोग पहुंचे और शाही स्नान किया। इस दौरान इसी एनीकेट में स्टोरेज पानी से कुंड में सप्लाई किया गया जिससे लोगों ने पुण्य स्नान किया। परंतु जैसे ही मेला समाप्त हो गए उसके बाद गेट बंद नहीं किया गया और अनवरत पानी बहता रहा धीरे-धीरे करके आधा से ज्यादा पानी बह गए हैं। अब तो नहाने लायक पानी भी नहीं है नहाने के लिए नदी पर उतरा तो नीचे जमे हुए कचरा ऊपर चला आता है और नहाते नहीं बनता। चौबेबांधा पुल के पास दिख रहे रेत, एनीकट में पानी भरी रहने के कारण चौबेबांधा पुल के पास 7 से 8 फीट पानी भरा रहता है लेकिन अब तो रेत दिखाई दे रहे हैं। और उसमें घास फूस उग गए हैं। इसमें पास मवेशी चारा चरने के लिए आ रहे हैं। नवागांव और चौबेबांधा, सिंधौरी, राजिम सहित बाहर से आने जाने वाले यात्रीगण भी यहां स्नान करते हैं लेकिन पानी कम होने के कारण नहाने में दिक्कत हो रही है। पानी भरने के बाद सभी लोग इनकी तारीफ करते थे तथा पानी का लेवल बना रहता था लेकिन अब तो तारीफ के बजाय जिम्मेदार विभाग को कोस रहे हैं। गेट से अभी भी बह रहा पानी, इस एनीकट से अभी भी पानी निकल रहा है कुछ गेट खुला छोड़ दिए गए हैं। इसी तरह से पानी बाहर होते रहे तो आने वाले किंग 4 दिनों में एनीकट पूरी तरह से खाली हो जाएंगे और बूंद भर भी पानी नहीं रहेगा फिर इनका कोई औचित्य नहीं रह पाएगा। जनता ने मांगा एनीकट पर लबालब पानी, क्षेत्र के खुमन पाल, विष्णु जांगड़े, भीखम सोनकर, भूषण पाल, गोकुल साहू, अनिल जांगड़े, लीला राम साहू, महेंद्र कुमार, तुलाराम, गोविंद पटेल इत्यादि अनेक लोगों ने नवागांव एनीकट के गेट को बंद कर पानी भरने की मांग प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे, विधायक अमितेश शुक्ला एवं विभागीय अधिकारियों से की है।