27 को किसान अधिकार रैली रायपुर में होंगे

राजिम:- घोषणापत्र  की  बात आने पर सरकार कुछ कहने से  आंख चुराती है ऐसा देखा गया है। वर्तमान प्रदेश सरकार को छत्तीसगढ़ में शासन करते हुए 4 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं परंतु इस सरकार ने अपने घोषणा पत्र में जो घोषणाएं की थी वह अभी तक आधी अधूरी है। जैसे भाजपा शासन काल का दो वर्ष का बोनस, ओनहारी फसलों को उचित मूल्य पर लेने की बात, सिंचाई परियोजनाओं में विलंब, किसानों का पूरा धान खरीदना आदि विषयों पर सरकार की चुप्पी साध‌ रखी है। सरकार छत्तीसगढ़ को धानवान छत्तीसगढ़ बता रही हैं परंतु क्या सही मायनों में छत्तीसगढ़ का किसान आत्मनिर्भर हुआ है ? यह पक्ष  प्रश्न सरकार के मुंह बाएं खड़ा है। सरकार की ओर से अभी तक दो वर्ष के बोनस जैसे विषयों को लेकर किसी भी प्रकार कोई चर्चा तक नहीं की है। इन बातों से सरकार की मंशा पर प्रश्न तो उठेंगे ही। सरकार द्वारा शराबबंदी नहीं होने से किसान परिवार ही अधिक भुगत रहा है। गांव का युवा नशे की लत में डूबा हुआ है। गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक रही है। एक नई संस्कृति जन्म ले रही वह दारु संस्कृति है। गौठान गौवंश के लिए बनाए गए हैं परंतु सही क्रियान्वयन नहीं होने से सभी गौवंश सड़कों पर खुले घूम रहे हैं जिस कारण ओनहारी फसलों को बचाना किसानों को कठिन हो गया है तथा बंदरों, जंगली सुअरों की समस्या बढ़ती जा रही है। राजस्व का भ्रष्टाचार चरम पर है बगैर पैसों के राजस्व के कोई कार्य नहीं हो रहे हैं। किसान परेशान है और प्रशासन में बैठे अधिकारियों की मौज है। सरकार की ओर से कहा गया की हमने गंगाजल की सौगंध मात्र कर्जमाफी के लिए खाई थी। तो क्या किसान यह माने जो वादे गंगाजल को उठाकर किये जायेंगे वहीं वादे पूरे किए जायेंगे तथा जो वादे गंगाजल को हाथ में लेकर नहीं किये गए हैं वे कभी पूरे नहीं किए जायेंगे। भविष्य में होने वाले चुनावों में सभी दल गंगाजल की सौगंध खाकर घोषणापत्र पढ़ेंगे तो ही प्रदेश के किसान दलों के घोषणापत्रों पर विश्वास करेंगे। भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर समय – समय पर जिला एवं ब्लॉक स्तर पर धरना प्रदर्शन एवं ज्ञापन के माध्यम से सरकार को अवगत कराते रहा है। बजट सत्र को ध्यान में रखकर अपने स्थानीय समस्याओं को लेकर प्रदेश के सभी विधायकों को ज्ञापन सौंपा गया है। अपने अधिकार की लड़ाई के लिए आगामी *27 फरवरी 2023* को *किसान अधिकार रैली* रायपुर में करना सुनिश्चित हुआ है। अतः गांव-गांव से किसान भाई इस रैली में अवश्य सहभागी बने।

सरकार से किसानों की प्रमुख मांगे –

1. पूर्व घोषित सिंचाई परियोजना एवं अधुरी पड़ी सिंचाई परियोजना को शीघ्र पूरा किया जायें (जैसे अरपा भैंसाझार, सूतिया पाठ (बायातट नहर) निर्माण, क्रांति जलाशय, कुम्हारी जलाशय, आदि  परियोजनाएं)

2. धान खरीदी प्रति एकड़ 20 क्विंटल करें।

3. चुनावी घोषणा पत्र में घोषित पूर्व सरकार के 2 वर्ष का बोनस देने का वादा पूरा करें।

4. सभी अस्थायी कृषि पंपों की लाइन स्थायी किया जाये, तेलंगाना राज्य के तर्ज पर छ ग. प्रदेश में बिजली नीती लागू की जाये (नये कनेक्शन 5 एचपी पर 6000 ₹ व 30 रूपये मासिक सेवा शुल्क) |

5. राज्य शासन द्वारा किसानों के नाम पर कंपनियों को दी जाने वाला अनुदान सीधे किसानों के खाते में दिया जाए।

6. प्रदेश में ओनहारी फसलों की समर्थन मूल्य परखरीदी की व्यवस्था की जाये।

7. पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी मुख्यालय में कार्यालयीन समय पर उपस्थित रहें तथा राजस्व संबंधित विषयों पर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे एवं तत्काल निराकरण हो।

8. प्रदेश में गांव-गांव में युवा वर्ग में नशे की लत बढ़ती जा रही है जिससे घरेलू हिंसा में वृद्धि हुई है। अतः सरकार प्रदेश में शराबबंदी का अपना वादा पूरा करे।

9. ग्रामों में गौठान बने हैं किन्तु गौवंश उसमें नहीं रखे जा रहे हैं। गौठानों में रखने की व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों का अपनी फसलों को बचाना कठीन हो गया है अतः गोठानों में गौवंश को रखने व बंदर, जंगली सुअर से फसल रक्षा हेतु उचित प्रबंधन की योजना करें।

10. किसानों के लिए किसान भविष्य निधी, किसान पेंशन योजना बनाई जाये ताकि 60 वर्ष पूर्ण होने के पश्चात किसानों को भी पेंशन मिल सके बुढ़ापे में सहारा मिल सके।

11. सहकारी साख समितियों में किसानों की सहभागिता बढ़ाने समितियों में चुनाव कराएं जाये।

12. कबीरधाम एवं मुंगेली जिले में नवीन शक्कर कारखानें खोले जाए।

13. भूमि अधिग्रहण में किसानों को मुआवजा राशि का भुगतान शीघ्र किया जाए।

14. जितने रकबे के गन्ना के लिए सरकार प्रोत्साहन राशि दे रही हैउतने ही रकबे के राजीव गांधी किसान न्याय योजना के पैसे में प्रोत्साहन राशि को घटाया जाय।

वादा किया है वादा निभाओ।

खेती और किसान बचाओ।।