मुड़ागांव (कोरासी):- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र खड़मा के बैनर तले शुक्रवार को निराकार परम पिता शिव बाबा की रथ, धूमधाम से निकाली गई। शोभायात्रा छुरा जनपद के ग्राम पिपरछेड़ी, नवापारा, मडेली, बोईर गांव पकटिया, बम्हनी, द्वार तरा करचली रानीपर्तेवा आदि ग्रामों का भ्रमण करते दोपहर एक बजे खडमा पहुंचा जहा ग्राम वासियों एवं समाज प्रमुखों में भगवान भोले नाथ के रथ का स्वागत किया। शिव बरात की सुंदर झांकियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। हाथ में शिव ध्वज लिए हुए श्वेत वस्त्रधारी ब्रह्मवत्सों ने जयकारे लगाए। यात्रा के मध्य में कई जगह शिव बाबा एवं ब्रह्मा वत्सो का फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र पर भगवान महादेव का रथ पहुंचा जहा शिव ध्वजा रोहन कर परमात्म शिव के अवतरण दिवस की 87 वी जयंती मनाई गई। स्थानीय खडमा सेवा केंद्र की प्रभारी ब्रह्मकुमारी अंशु दीदी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्रीय जाति ग्रामीण समाज प्रमुखों की आतिथ्य में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।सभी ग्रामीण समाज से पहुंचे समाज प्रमुखों का ब्रह्मकुमारी बहनों ने तिलक देकर स्वागत किया।
मुख्य वक्ता ब्रह्मा कुमारिज के सेवाकेंद्र छुरा की प्रभारी ब्रह्माकुमारी गायत्री दीदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय कलियुग के अंत का समय है।शिवरात्रि का त्योहार अज्ञान के अंधकार की रात्रि को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश लाने का यादगार पर्व है। अपने जीवन से बैर अर्थात बुराइयों को शिव पर अर्पित करना ही सच्ची शिव रात्रि मनाना है उन्होंने कहा कि समय बहुत तीव्र गति से आगे जा रहा है। कोई भी श्वास मनुष्य की अंतिम श्वांस हो सकती है। यदि यह अमूल्य समय आपने गंवा दिया तो आपको पछताने का मौका भी नहीं मिलेगा। ब्रह्मा कुमारी बहन ने बताई की परम पिता परमात्मा शिव ही है,जिसे सभी धर्म,जाति,संप्रदाय,के लोग मानते है जो सर्वमान्य है।जिसे मनुष्य मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारे आदि स्थानों में ढूंढते है।पर उसे जानते नही। ब्रह्मा कुमारी बहन ने बताई की वो परमात्मा पिता को इस धरा में अवतरित हुए 87वर्ष हो चुके है।इस लिए आज भारत ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व के 165 देशों में कल्याणकारी शिव पिता के अवतरण दिवस को 87वी त्रिमूर्ति शिव जयंती आज महाशिवरात्रि के दिन मनाते है।उन्होंने बताई की परमात्मा आते है तो तो संपूर्ण विश्व की आत्माएं जो काम क्रोध,लोभ,मोह,अहंकार,ईर्षा,द्
