
राजिम :- आगामी 5 फरवरी से शुरू राजिम माघी पुन्नी मेला की तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही है हर हाल में मेला मैदान पर हो रहे तैयारियां माघ पूर्णिमा से पहले 4 फरवरी तक कंप्लीट हो जाएंगे और 4 फरवरी को ही शाम से रौनकता देखने को मिल जाएगी। नट बोल्ट एवं लोहे की रॉड से झूला को तैयार किया जा रहा है। पहले की अपेक्षा अब कम दिनों में ही तैयारियां पूर्ण हो जाती है। आधुनिक मशीनों एवं नट बोल्ट के सहारे मीना बाजार के कर्मचारी कह रहे हैं कि 3 तारीख तक सारे कार्य पूरी हो जाएगी। आज जिस ढंग से काम को देखा गया उसके हिसाब से 4 फरवरी को ही पूर्ण हो पाएंगे। मैदान में जहां पर गड्ढे थे और गंदे पानी भरे हुए थे उस जगह को मिट्टी से पाट दिया गया है इससे मैदान की लंबाई चौड़ाई बढ़ गई है। नदी में भी काम देखते ही बन रही है गंगा आरती घाट पर लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर मंडप बनाया गया है। महानदी की महा आरती में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं गीत गजल भजन भी चलते हैं जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो जाते हैं। स्नान के लिए कुंड बनाए गए हैं पानी का लेवल बना हुआ है इससे श्रद्धालु एक साथ बड़ी संख्या में स्नान कर पाएंगे। नदी के अंदर ही रेत के सड़कों का जाल बिछ गया है। राजिम माघी पुन्नी मेला मैं रेत की सड़कें अलग उदाहरण प्रस्तुत करती है। श्री राम का विशाल प्रतिमा होंगे आकर्षण । महोत्सव मंच के सामने उत्तर दिशा की ओर प्रभु रामचंद्र जी का विशाल प्रतिमा राम वन गमन पथ के अंतर्गत बनाया गया है यह आकर्षण का केंद्र है इसके बॉर्डर पर नीचे रामायण कालीन अनेक चित्र बनाए गए हैं जिससे रामायण के पात्रों को विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से दिखाया गया है। जिसे दर्शन करने बड़ी संख्या में अभी से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस बार नदी का ट्रक बदला हुआ नजर आ रहा है। नेहरू पुल से लेकर गंगा आरती घाट तक तट में सिढ़ी बनाया गया है। गेरुआ कलर के पत्थरों का उपयोग किया गया है इससे दूर से ही इनकी आभा देखते ही बन रही है। यहां प्रमुख रूप से 5 घाट है जिनमें से सोनतीर्थ घाट पवन दीवान आश्रम के सामने हैं। अटल घाट, संगम घाट, नेहरू घाट, बेलाही घाट मौजूद है इन्हीं घाटों पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में स्नान कर पूजा मिशन करते हैं। परंतु इस बार घाटों के अलावा नदी की धार लंबे चौड़े आकार में बह रही है जिससे श्रद्धालु कहीं पर स्नान कर सकते हैं। लोग चर्चा कर रहे हैं कि मेले में किसी राष्ट्रीय संत को बुलाना चाहिए ताकि उनके प्रवचन सुनने का लाभ लोगों को मिले। वैसे राजिम मेले की परंपरा रही है के यहां बड़े से बड़े संतो की वाणी से अमृत बरसते हैं। प्रशासन के द्वारा प्रदेश के बड़े संतो को बुलाया जाता है जिसमें वह रामकथा का गुणगान करते हैं। परंतु जनता इस बार चाह रही है कि राजिम क्षेत्र की महिमा का गुणगान किया जाए ताकि यहां के महत्व से लोगों को जानकारी इकट्ठा हो। इस बार कौन कौन से कलाकार आ रहे हैं तथा किन की प्रस्तुति होगी रामायण में किस मंडली को आमंत्रित किया गया है यह जानकारियां अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है जिसके कारण कलाकारों की तैयारियां अटकी हुई है। शीघ्र यह जानकारी चयनित टीम के मैनेजर के पास पहुंचे तब पूरी तैयारी के साथ अपने कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगे। लोगों का कहना है कि कई कार्यक्रम ऐसे होते हैं जो प्रस्तुति कर चले जाते हैं तब उनको पता चलता है इस बार कार्यक्रम होने से पहले प्रचार-प्रसार होना चाहिए ताकि ऐसे सांस्कृतिक सामाजिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम देखने वाला सुनने का अवसर उन्हें मिल पाए।
