सुरहूति में साहिर की गज़ल

राजिम :- शहर के युवा शायर जितेंद्र सुकुमार साहिर की छत्तीसगढ़ी गजल छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित पत्रिका सुरहूति में प्रकाशित हुई है। इसमें छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित रचनाकारों की रचनाओं को स्थान मिला है। बताना होगा कि 14 लाइनों में पूर्ण हुए इस छत्तीसगढ़ी गजल में परिवार को मजबूती प्रदान करने तथा एकता एवं अनुशासन पर बल देते हुए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। साहिर लगातार देशप्रेम, संस्कृति, संस्कार एवं एकता और अनुशासन पर हमेशा फोकस करते हैं। उल्लेखनीय है कि अधिकांशतः साहिर की गजलें देश के प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लगातार स्थान पर रही है । वह हिंदी उर्दू के साथ ही छत्तीसगढ़ी भाषा को पोठ करने के लिए पिछले दो दशकों से छत्तीसगढ़ी में लगातार कलम चला रहे हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा की पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित हो रहे हैं। बताना जरूरी है कि उनकी 4 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है दर्जनभर पुस्तकें प्रकाशन की स्थिति पर है। वर्तमान में वह रत्नांचल जिला साहित्य परिषद गरियाबंद के अध्यक्ष एवं प्रयाग साहित्य समिति के महासचिव के पद पर आसीन हैं। उनके द्वारा लिखित छत्तीसगढ़ी ग़ज़लों की चर्चा इन दिनों खूब हो रही है। इनकी ग़ज़ल प्रकाशन पर इनके कवि मित्र एवं शुभचिंतकों ने बधाई प्रेषित की है। इस मौके पर साहिर ने बताया कि उर्दू गजल के बाद दुष्यंत कुमार ने हिंदी ग़ज़लों में आम जन, शोषित मजदूर, पूंजीपतियों के जुल्मो सितम को विषय बनाया। जिस से प्रेरित होकर कई लोग हिंदी ग़ज़ल की ओर चल पड़े लेकिन हिंदी ग़ज़ल के साथ साथ आज छत्तीसगढ़ी में भी खूब ग़ज़लें लिखी जा रही है। और ग़ज़लों को पसंद भी किया जा रहा है।