राजिम विधानसभा में मतदाता ढूंढ रहे मनपसंद प्रत्याशी

राजिम :- पूरे छत्तीसगढ़ में राजिम विधानसभा पुराने समय से चर्चित रहा है इसने अविभाजित मध्यप्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री दिए, एक बार जेल मंत्री बने तथा छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री का तोहफा मिला। उसके पश्चात तो मात्र विधायक चुनकर ही राजधानी के गलियारों तक पहुंचे। लेकिन कोई मंत्री नहीं बन पाए। सन् 2003 के बाद से पूरे 20 साल हो गए और अभी तक राजिम विधानसभा से कोई मंत्री नहीं बना है। अलबत्ता पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के स्टार प्रचारक राजेश खन्ना कांग्रेसी प्रत्याशी के चुनाव प्रचार में राजिम पहुंचें। उन्होंने भरी सभा में कहा कि आप लोग विधायक नहीं बल्कि मंत्री चुन रहे हैं इसलिए सोच समझकर अपने कीमती वोट का प्रयोग कीजिए। जैसा उन्होंने कहा था जनता ने भी वैसा ही किया और अपने विधानसभा क्षेत्र में चुने विधायक को 58000 से भी अधिक वोटों से जीता कर प्रचंड मतों से जीत दर्ज कराई। जनता ने तो अपना वादा निभा दिया लेकिन सरकार ने मंत्री बनाने की बात तो दूर किसी आयोग के अध्यक्ष तक बनाना भी उचित नहीं समझा और मात्र विधायक ही है। जैसे तैसे अब चुनाव की तारीख भी नजदीक आ रही है इस तरह से स्टार प्रचारक की खोखली आवाज जनता के कानों में आज भी गूंज रही है। जनता कह रही है कि इन चार वर्षों में राजिम विधानसभा क्षेत्र में कोई बड़े काम नहीं हुए हैं। वर्तमान में राजिम को जिला बनाने की मांग तेजी से चल रही है यहां तक कि यह बात पहुंचाने वाला कोई विधायक या फिर नेता नहीं मिले, तब आम जनता ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास भेंट मुलाकात में पहुंचे और सीधे राजिम को जिला बनाने की मांग किये। करीब 19 घंटे तक शहर में रुके मुख्यमंत्री के पास तीन बार राजिम को जिला बनाने की आवाज उठी। रेस्ट हाउस में पहली बार पत्रकारों ने उठाई। दूसरी बात आम जनता ने रखें तथा तीसरे बार पुनः प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने पूछ ही लिया कि क्या राजिम जिला बन पाएगा। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा की जिला को खड़ा करने में समय लगता है। इतना कहना था और बात दूसरे विषय की ओर चल पड़ी। उन्होंने राजिम को कोई बड़ी सौगात भी नहीं दी। यहां के जनप्रतिनिधि चुपचाप बैठे रहे लेकिन जिला के संबंध में एक शब्द भी नहीं कहने से तरह-तरह की बातें उठती रही। अब तो विपक्षी दल के लोग इसे अपना चुनाव जीतने का हथकंडा मानकर चल रहे हैं। राजिम जिला चुनाव में प्रमुख मुद्दा हो सकता है। बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी इस बार के विधानसभा चुनाव बहुत ही दिलचस्प रह सकता है। चूंकि अधिकांश लोग चुनाव लड़ने का मन बनाए हुए हैं ऐसी कैंडिडेट पहले तो पार्टी से टिकट मांगेंगे, नहीं मिलने पर बागी हो सकते हैं और निर्दलीय प्रत्याशियों की होड़ लग सकती है। कुछ ऐसे प्रत्याशी है जो अभी से अपने चुनाव की प्रचार प्रसार करने में जुट गए हैं। गांव गांव जाकर लोगों से मुलाकात कर रहे हैं तथा चुनाव जीतने पर राजिम को जिला बनाने के अलावा क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम करने का आश्वासन दे रहे हैं।आम आदमी पार्टी और बसपा भी हो सकते हैं प्रमुख प्रतिद्वंदी राजिम विधानसभा में अभी तक भाजपा, कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी की जबरदस्त एंट्री देखने को मिल रही है। समय-समय पर किंचित मुद्दों को लेकर कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। बसपा चुनाव में दमखम के साथ आ सकती है। चुनाव में क्षेत्रीय दल भी जोर लगा सकते हैं। प्रमुख दलों के अलावा अन्य दल भी अभी से अपने प्रत्याशी के लिए सर्वे कराने का काम में जुट चुके हैं। खबर के मुताबिक भाजपा संगठन में 80% नए प्रत्याशी होने की जानकारी मिल रही है। 20% से पुराने को मौका दिया जाएगा। इधर पार्टी जितने वाले प्रत्याशी ढूंढ रहे हैं तो मतदाता अपने मनपसंद के कैंडिडेट को विधायक बनाने के मूड में है।