कान्हा दही के आड़ में सखियों के चित चुराते हैं: पंडित देवेंद्र तिवारी
लोहरसी में भागवत कथा में श्रद्धालुओं ने छक्कर खाया माखन

राजिम 24 फरवरी। कान्हा दही के आड़ में सखियों के चित चुराते हैं हृदय में बसे पांच विकार काम क्रोध मद लोभ मत्सर आदि से उन्हें छुटकारा दिलाया। भागवत महापुराण सद्विचार एवं सदगुण प्रदान करने का काम करती हैं बस इन्हें मन से सुनने की आवश्यकता है। उक्त बातें लोहरसी में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के चौथे दिन भागवताचार्य पंडित देवेंद्र तिवारी ने कही। उन्होंने श्री कृष्ण के बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि ललिता और बिशाखा सखी कृष्ण को पकड़ने के लिए प्रतिदिन नए नए पैंतरे लगाते। एक दिन कृष्ण अपने सखाओ के साथ पिरामिड बनाकर माखन चुरा रहे थे। उन्हें देखकर तुरंत पकड़ लिया और बोरे में भरकर उनके मां यशोदा के पास ले गए जैसे ही सखियों ने चिल्लाया की यशोदा मैया तुम्हारे लल्ला चोरी करता है आज हमने इसे रंगे हाथों पकड़ा है सजा जरूर देना ताकि भविष्य में यह चोरी करना छोड़ दें इतने पर यशोदा कहती है मेरा कान्हा को घर में है तुम किसे पकड़ कर लाए हो, खोल कर देखो जैसे ही बोरे को खोल कर देखा गया तो वह उनका पति निकला। सखियां मायूस होकर वापस चली आई। पंडित तिवारी ने कहा कि इस दृश्य के पीछे सखियों के अंदर अति आत्मविश्वास को समाप्त करना था। उन्होंने आगे बताया कि यशोदा कृष्ण को रस्सी में बांध रहे थे लेकिन हर बार वह रस्सी छोटा पड़ जाता इससे मैया व्यथित हो गई और उनको बांधना ही छोड़ दिए तब पुत्र ने कहा कि मां आप मुझे क्रोध से बांध रही हो जबकि मैं प्रेम से बंध जाता हूं। ईश्वर प्रेम से मिलते हैं उनके लिए श्रद्धा भक्ति एवं विश्वास होना जरूरी है। भक्त प्रहलाद श्रद्धा भाव से श्रीहरि के नाम पत्थर पर लिख दियि और रटन करना शुरू किया। उनकी पुकार सुनकर स्वयं प्रकट हो गए। आज हम ईश्वर को सिर्फ अपने फायदे के लिए आवाज लगाते हैं मंदिर में भी जाते हैं तो नारियल चढ़ाकर उनसे मनोकामना की पूर्ति के लिए याचना करते हैं भगवान से मांगने की जरूरत नहीं है वह समय आने पर सब कुछ प्रदान कर देता है। पंडित ने आगे कहा कि जल में वरुण देव का निवास होता है इसलिए बिना वस्त्र के स्नान करना वर्जित है इससे दोष लगता है। गोवर्धन पर्वत प्रसंग पर कहा कि जोखिम उठाना कृष्ण से सीखे वाह प्रबंधन के गुरु है। नगर वासियों को इंद्र की पूजा करना बंद करा दिया और गोवर्धन अर्थात प्रकृति का पूजा करना शुरू कर दिया। इससे इंद्र क्रोधित हो गए जिनके कोप गांव वालों को सहना पड़ा। तब कृष्ण गोवर्धन पर्वत को उठा कर मानव जीवन को बचाया। अच्छे काम के लिए जोखिम उठाने से हिचकना नहीं चाहिए क्योंकि कार्यों में यदि लोक कल्याण की भावना छिपी हो तो निश्चित ही ईश्वर सहायता के लिए अलग-अलग रूप में आते हैं। इस दरमियान दही लूट का शानदार झांकी दिखाया गया छोटे-छोटे बच्चे सखा ग्वाल बाल एवं कृष्ण का वेश धारण किए थे। कुछ समय के लिए द्वापर युग का दृश्य लोहरसी में परिलक्षित हो रही थी। हुबहू दही लूट में दही न सिर्फ सखा खाएं बल्कि श्रोतागण भी छक्कर प्रसाद ग्रहण किए। क्षेत्र के प्रसिद्ध गायक पवन साहू के द्वारा अनेक धार्मिक भजन प्रस्तुत किया गया जिसे सुनकर श्रद्धालु गन भावविभोर हो गए व झूमते रहे। छोटे-छोटे बच्चियो ने डांडिया नृत्य किया जो आकर्षण का केंद्र बने रहे। नाल वादक प्रदीप ने संगीत का जादू बिखेरा। पूजन आरती में पूरा गांव उमड़ गया और राधे राधे श्याम से मिलादे के जयघोष में रंग गया था। इस मौके पर प्रमुख रूप से हिरन्य निषाद, अमेरिका निषाद, जागेश्वर निषाद, अशोक कुमार, प्रभु साहू, हरक राम, खोरबाहरा सिंहा, गीतकार कमलेश कौशिक, देव लाल साहू, युगल किशोर साहू, विश्वनाथ पटेल, वार्ड पंच माया देवी तिवारी, लक्ष्मी नारायण तिवारी, साहित्यकार संतोष कुमार सोनकर मंडल, गुंजेश्वरी सोनकर, रामति सोनकर आदि बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
