*भक्ति और अहंकार एक साथ नहीं रह सकते:- जयशंकर*

*भक्ति और अहंकार एक साथ नहीं रह सकते:- जयशंकर*
*अत्याचार और अहंकार की एक सीमा है*
*ईश्वर के न्याय चक्र से कोई बच नहीं सकता*
राजिम। समीपस्थ ग्राम कुम्ही में चल रहे भागवत कथा के दौरान आचार्य जयशंकर ने कहा कि जिस तरह एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकती, उसी तरह भक्ति और अहंकार छल- कपट दिखावा और प्रेम एक साथ नहीं रह सकते। उन्होंने बाणासुर के प्रसंग पर कहा कि आसुरी प्रवृत्तियां उकसाने का काम करती। इसलिए इस के सानिध्य में आने वाले लोगों को सुख दुख लाभ हानि हित हित का ज्ञान नहीं रहता। संसार में कई तरह के प्राणी होते हैं। और यह संसार उन्ही विशेषताओं से भरा पड़ा है। कोई सत्य पर तो कोई असत्य पर, कोई भक्ति पर तो कोई झूठ की बुनियाद पर टिका हुआ है। धर्म इंसान को रास्ता बताने का कार्य करता है। यदि उसके बावजूद व्यक्ति उसकी अनदेखी करता है तो उसका दुष्प्रभाव उसके जीवन के साथ साथ उससे जुड़े व्यक्तियों पर भी पड़ता है।इसलिए धर्म का अनुसरण करना चाहिए। ईश्वर को दिखावा बर्दाश्त नहीं है। ईश्वर सादगी-निष्ठा और समर्पण का भूखा होता है।
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*वर्तमान दौर चुनौतियों से भरा है*
आचार्य मिश्रा ने कहा कि वर्तमान दौर चुनौतियों से भरा है इसका डटकर सामना करें, घबराए नहीं क्योंकि प्रकृति संतुलन बनाए रखने के लिए इस दुनिया को नियंत्रित करने में सक्षम है। इस दुनिया में प्रकृति को मनुष्य को नुकसान पहुंचाने का यह नया खेल नहीं खेला गया इससे पहले भी लोगों ने प्रकृति और इंसान से खिलवाड़ करने का खेल खेला था नतीजतन लोगों को इसकी भरपाई करनी पड़ी थी कई उदाहरण है जर्मनी अमेरिका कुवैत बगदाद और जापान इसकी भरपाई कर चुके हैं।
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*सुदामा और विदुर की भक्ति वंदनीय*
आचार्य मिश्र ने कहा कि अपनी दीनता के बावजूद सुदामा ने भक्ति की चरम सीमा तक पहुंचकर ईश्वर को प्राप्त किया वही विदुर राज दरबार में मंत्री होने के बावजूद उन पर सत्ता का गुरूर सवाल नहीं हुआ यह ऐसे पात्र हैं जिन्होंने सिखलाया की भक्ति के लिए स्वच्छ मन हो की आवश्यकता है ना कि धन की। कथा के दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भक्ति में संगीत की धुनों पर थिरकते नजर आए और भगवत गीता के जयकारे लगाते देखे गए। परीक्षित के रूप में देव लाल साहू श्रीमती राजकुमारी साहू थे, वहीं विशाल साहू, कलाबाई, मिला बाई, देवीलाल, बिसेलाल, राकेश, राज कुमारी, मनीषा, राजा राम, किशुन, अवध राम, सुखदेव, मेहता राम, भगत राम, मोतीराम सहित सैकड़ों लोग कथा का रसपान करने भागवत कथा परिसर पर उपस्थित थे। कथा के दौरान पूजा-अनुष्ठान और परायण आचार्य विजय कुमार मिश्रा ने किया।