गरियाबंद – खरीफ वर्ष 2026 में गरियाबंद जिले को भारत सरकार की फर्टिलाइजर सेल एप्लीकेशन सिस्टम (एफएसएएस) पायलट परियोजना में शामिल किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुगम एवं किसान हितैषी बनाना है। इसके माध्यम से किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण संबंधी जानकारी डिजिटल माध्यम से प्राप्त होगी तथा उर्वरकों के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी। परियोजना के तहत किसान अब मोबाइल एप फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के माध्यम से सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं से उर्वरकों की बुकिंग एवं खरीदी कर सकेंगे। यह व्यवस्था किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ-साथ वितरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाएगी।
एफएसएएस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले में मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूर्ण किया जा चुका है। कृषि विभाग के कार्यालय में 30 मई 2026 को उर्वरक विक्रेताओं एवं कृषकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यशाला में विकासखंड गरियाबंद एवं छुरा के कृषकों के साथ-साथ निजी उर्वरक विक्रेताओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एफएसएएस प्रणाली की कार्यप्रणाली, मोबाइल एप के उपयोग, उर्वरक बुकिंग प्रक्रिया तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के विभिन्न फीचर्स की जानकारी दी गई।
मास्टर ट्रेनर एवं सहायक संचालक कृषि अनिल कौशिक ने मोबाइल एप के संचालन संबंधी सभी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को एप के माध्यम से पंजीयन, उर्वरक बुकिंग, उपलब्धता की जानकारी प्राप्त करने तथा अन्य सुविधाओं के उपयोग की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था से किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में अधिक सुविधा होगी तथा वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। कृषि विभाग ने बताया कि जिले में इस पायलट परियोजना के माध्यम से डिजिटल तकनीक का उपयोग कर किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने एफएसएएस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत
मोबाइल एप के माध्यम से किसान कर सकेंगे उर्वरकों की बुकिंग, कृषकों एवं विक्रेताओं को दिया गया प्रशिक्षण
