पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल बना खमढोड़गी: 70 हजार सीड बॉल तैयार कर रचा हरियाली का नया इतिहास

फिंगेश्वर :–जब पूरा देश पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, तब उत्तर बस्तर कांकेर जिले का एक छोटा-सा गांव सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त ग्राम खमढोड़गी आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बनकर उभर रहा है। ग्राम पंचायत कोकपुर के अंतर्गत आने वाले इस गांव में आयोजित विशाल सीड बॉल महाअभियान एवं कार्यशाला ने यह साबित कर दिया कि यदि समाज, युवा और बच्चे एकजुट हो जाएं, तो बंजर हो रही धरती को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है। यह ऐतिहासिक महाअभियान सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त ग्राम खमढोड़गी एवं प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।गांव के छात्र-छात्राओं, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने मिट्टी से केवल सीड बॉल नहीं बनाई, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित प्रकृति का एक नया सपना गढ़ा है। दिन में 1 लाख का संकल्प, 70 हजार तैयार कर रचा इतिहास इस महाअभियान का लक्ष्य एक ही दिन में 1 लाख सीड बॉल तैयार करना था। प्रथम चरण में ही ग्रामीणों और पर्यावरण मित्रों ने अपनी अथक मेहनत, समर्पण और सामूहिक सहभागिता से 70000 (सत्तर हजार) सीड बॉल तैयार कर एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया।कार्यक्रम की सबसे सुंदर तस्वीर तब सामने आई, जब छोटे-छोटे बच्चे अपने कोमल हाथों से मिट्टी और बीजों को आकार दे रहे थे। युवाओं के उत्साह और महिलाओं की एकजुटता ने इस सरकारी या सामाजिक कार्यक्रम को एक ‘जनआंदोलन’ में बदल दिया। ग्रामवासियों ने संकल्प लिया है कि शेष 30 हजार का लक्ष्य भी जल्द पूरा कर खमढोड़गी को देश का एक मॉडल विलेज बनाया जाएगा। इस महाअभियान को दिशा देने और ग्रामीणों का उत्साह बढ़ाने के लिए पर्यावरण एवं विज्ञान जगत की कई प्रबुद्ध हस्तियां शामिल हुईं:मुख्य अतिथि मनीष अहीर (सीड बॉल विशेषज्ञ, जगदलपुर)अध्यक्षता अनीता मंडावी (ग्राम सभा अध्यक्ष,ग्राम खमढोड़गी)विशेष अतिथि एकता जी(प्रख्यात पर्यावरणविद, जगदलपुर)प्यार सिंह मंडावी (पूर्व सरपंच, ग्राम खमढोड़गी)छबिलाल कुंजाम (वन प्रबंधन समिति ग्राम खमढोड़गी) भुनेश्वर मरकाम जी (प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा, छत्तीसगढ़)शिव कुमार कावडे (अध्यक्ष, नवयुवक मंडल खमढोड़गी) रजोतीन दुग्गा (वार्ड पंच)पर्यावरण और तकनीक पर प्रबुद्ध जनों के विचार*कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के वरिष्ठ विचारकों और विज्ञान संचारकों ने सीड बॉल और पर्यावरण के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए.लखन लाल साहू ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर उस नागरिक का कर्तव्य है जो इस धरती पर सांस ले रहा है। खमढोड़गी ने आज पूरे प्रदेश को रास्ता दिखाया है।प्रसिद्ध विज्ञान संचारक और सामाजिक कार्यकर्ताबृजलाल मंडावी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि हमें वनों को बचाने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का मेल करना होगा। यह सीड बॉल अभियान उसी वैज्ञानिक सोच का हिस्सा है जो कम लागत में हमारे जंगलों को पुनर्जीवित कर सकता है।प्रदीप कुमार मंडावी ने सीड बॉल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह तकनीक भविष्य की उम्मीद है। मिट्टी और खाद के आवरण में सुरक्षित ये बीज बारिश की पहली बूंद पाते ही जंगलों और पहाड़ियों पर स्वतः अंकुरित होकर विशाल वृक्षों का रूप लेंगे, जो हमारे पर्यावरण को नया जीवन देंगे.यह पूरा अभियान विज्ञान संचारक कुमार मंडावीके कुशल मार्गदर्शन में तथा नवयुवक मंडल खमढोड़गी के सक्रिय सहयोग से संपन्न हुआ।कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर सफल बनाने में फणीश्वर साहू, नीलिमा गौतम, रमेश कुमार उईके, आत्माराम साहू, हेमंत उईके, शत्रुघ्न नेताम, बीरेन्द्र आचला, जितेन्द्र हिचामी, कमलेश कुंजाम, दीपक दुग्गा, विनिता कावडे, निक्की उसेंडी सहित स्थानीय नवयुवक मंडल एवं समस्त ग्रामवासियों का अभूतपूर्व और सराहनीय योगदान रहा।आज खमढोड़गी केवल एक भौगोलिक नाम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से उपजी एक नई ‘हरित क्रांति’ की पहचान बन चुका है.(सामुदायिक वन संसाधन अधिकार) मिलने के बाद ग्रामीणों ने जिस जिम्मेदारी से अपने वनों और पर्यावरण को सहेजने का बीड़ा उठाया है, वह पूरे देश के प्रशासनिक अमले और सामाजिक संगठनों के लिए एक केस स्टडी (अध्ययन) है।खमढोड़गी से उठी यह हरियाली की अलख अब रुकने वाली नहीं है, यह पूरे छत्तीसगढ़ को महकाएगी.उक्त जानकारी विज्ञान संचारक पूरन लाल साहू ने दी.