पर्यावरण और राहगीर हैं परेशान
राजिम :- रबी फसल की कटाई खत्म होते ही राजिम-नवापारा क्षेत्र के हजारों हेक्टेयर खेतों में पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो गया है। किसान खरीफ की तैयारियों के बीच खेत साफ करने के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर पराली में आग लगा रहे हैं। इससे न सिर्फ वायु प्रदूषण बढ़ रहा है बल्कि सड़कों पर धुएं के गुबार से राहगीरों को आवागमन में भारी दिक्कत हो रही है।
क्षेत्र के किसान इन दिनों खेतों में बची रबी फसल की पराली को नष्ट करने के लिए आग का सहारा ले रहे हैं। सुबह से शाम तक खेतों से उठता धुआं पूरे इलाके में फैल रहा है। नेशनल हाईवे और मुख्य मार्गों के किनारे स्थित खेतों में पराली जलाने से विजिबिलिटी कम हो रही है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। वाहन चालकों को धुएं के कारण सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायत हो रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने से खेत की मिट्टी की उर्वरक शक्ति बुरी तरह प्रभावित होती है। मिट्टी में मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे लंबे समय में पैदावार घटती है। इसके बावजूद किसान कम समय और लागत बचाने के लिए यही तरीका अपना रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशासन की ओर से पराली जलाने पर रोक के लिए कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। न तो किसानों को जागरूक किया जा रहा है और न ही निगरानी दल सक्रिय हैं। इसी वजह से किसान बेखौफ होकर भीषण गर्मी में भी खेतों में आग लगा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत सख्त कदम उठाए। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनें और विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। यदि समय रहते रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और खतरनाक हो सकता है। फिलहाल नवापारा-राजिम क्षेत्र में पराली का धुआं पर्यावरण और सेहत दोनों के लिए संकट बना हुआ है।
