महासमुंद – जल संरक्षण और भूमिगत जल स्तर सुधार की दिशा में सरायपाली विकास खण्ड के ग्राम सानपंधी के ग्रामीणों ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। गांव के लोगों ने बिना किसी सरकारी सहायता के पिछले सात वर्षों से तालाबों का गहरीकरण कर जल संकट से निपटने का सफल प्रयास किया है। ग्रामीण हर वर्ष गांव के अलग-अलग तालाबों का गहरीकरण कराते हैं, जिससे अब गांव के तालाब गर्मी में भी पानी से भरे रहते हैं और बोरवेल के जलस्तर में भी सुधार देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कुल छह निस्तारी योग्य तालाब हैं। इन तालाबों का मछली पालन ठेका पांच वर्षों के लिए अलग-अलग राशि में दिया जाता है। ठेका राशि गांव के विकास और जल संरक्षण कार्यों में उपयोग की जाती है। पहले यह राशि ग्रामीणों में बांटी जाती थी, लेकिन पिछले सात वर्षों से इसे तालाब गहरीकरण में लगाया जा रहा है।
इसी कड़ी में 19, 20 और 21 मई को डबरी तालाब का गहरीकरण कराया गया। तीन दिनों तक चले कार्य में दो जेसीबी और लगभग 30 ट्रैक्टर लगाए गए। इस दौरान 1093 ट्रॉली मुरूम और मिट्टी निकाली गई, जिसकी लागत लगभग दो लाख रुपये बताई गई है। ग्रामीणों के अनुसार पहले बड़े तालाब, फिर बावली तालाब, जाड़ा मुड़ा तालाब और इस वर्ष डबरी तालाब, बांधा तालाब व छोटा तालाब का गहरीकरण किया गया है।
जलस्तर में दिख रहा सुधार
ग्रामीणों का कहना है कि तालाबों के गहरीकरण का सीधा असर गांव के जलस्तर पर पड़ा है। वर्तमान में बड़े तालाब में लगभग सात फीट और बावली तालाब में करीब दस फीट पानी मौजूद है। अन्य तालाबों में भी निस्तारी और स्नान योग्य पानी उपलब्ध है। गांव में 15 से 17 निजी बोरवेल होने के बावजूद जल संकट की स्थिति नहीं बनी है।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले गर्मी के दिनों में तालाब सूख जाते थे और पानी की भारी समस्या होती थी, लेकिन लगातार गहरीकरण से अब स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। इससे पशुओं और ग्रामीणों को वर्षभर पानी उपलब्ध हो रहा है।
पांच वर्षों के लिए होता है तालाबों का ठेका
ग्रामीणों ने जानकारी दी कि गांव के सभी तालाबों का ठेका पांच वर्षों के लिए दिया जाता है और इसकी राशि हर वर्ष एक जनवरी को जमा होती है। बड़े तालाब का ठेका पांच लाख रुपये, छोटे तालाब का तीन लाख 70 हजार, बातवली तालाब का 56 हजार, जाड़ा मुड़ा तालाब का 50 हजार, डबरी तालाब का 25 हजार तथा डीपापारा तालाब का एक हजार रुपये में दिया गया है।
बाक्स मेटर
मात्र 20 रुपये प्रति ट्रॉली में मिलती है मुरूम
तालाब गहरीकरण से निकली मुरूम और मिट्टी को ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए पंचायत स्तर पर केवल 20 रुपये प्रति ट्रॉली शुल्क तय किया गया है। इससे गरीब परिवार भी आसानी से पांच से दस ट्रॉली मुरूम अपने घर, बाड़ी और रास्तों में डलवा लेते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे गांव में छोटे स्तर पर निर्माण और समतलीकरण कार्यों में भी मदद मिल रही है।
बिना सरकारी मदद के बनाया एक किलोमीटर मार्ग
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष बावली तालाब से निकली मुरूम का उपयोग सानपंधी से बड़े पंधी तक पहुंच मार्ग के मुरमीकरण में किया गया था। करीब एक किलोमीटर लंबे कच्चे और पगडंडी मार्ग को ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान और सहयोग से बेहतर रास्ते में बदल दिया। इससे लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने के साथ समय और दूरी दोनों की बचत हो रही है। गांव के इस सामूहिक प्रयास की क्षेत्र में सराहना की जा रही है।
