फिंगेश्वर :–संस्कृत विषय बचाओ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू, डॉ नारायण साहू,मनोज कुमार वर्मा, सुनील कुमार, रामानंद ध्रुव, दिनेश मांडवी,शारदा साहू, ईश्वरी यदु, कामिनी पिल्लई,डॉ कोमल वैष्णव नरेश विश्वकर्मा,तरुण कुमार साहू, पूरन लाल साहू,शंकर लाल साहू, नोयन बुडेक, दिनेश ध्रुव,जी.एस बघेल, सनत वर्मा, हुसैन लाल पुजेरी, शिरीस श्रीवास्तव, महेश्वर द्विवेदी, हेमंत कुमार शर्मा ने छत्तीसगढ़ में संस्कृत विषय की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल के पाठ्यक्रम से कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं तक सचिवालय स्तर पर षडयंत्र पूर्वक हटाया जा रहा है, इसे अवगत कराकर संस्कृत को पूर्व की भांति हरियाणा राज्य के तर्ज पर अनिवार्य विषय करने और संस्कृत के विकल्प के रूप में नवीन व्यावसायिक शिक्षा लागू किया गया है उसे सातवें विषय के रूप में स्थान देने के लिए मांग पत्र राजीव भवन शंकर नगर कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी छत्तीसगढ़ दीपक बैज जी को सौपा गया । उक्त अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि स्कूलों में ब्यूटी पार्लर जैसे विषय को लागू करके एन जी ओ और प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा बालिकाओं को जो अध्ययन का काल होता है मुख्यधारा से भटका रही है जो बिल्कुल अनुचित है. हम प्रदेश कांग्रेस की ओर से इसका विरोध करते हैं, संस्कृत संस्कार परक भाषा है इनका संरक्षण और संवर्धन अति आवश्यक है ।संघ के पदाधिकारी ने बताया कि अपने मांग को लेकर अब तक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मंडलम्, स्कूल शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, रायपुर सांसद, बेमेतरा दुर्ग रायपुर महासमुंद के जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी तथा बेमेतरा दुर्ग,खल्लारी,राजिम,कुरूद, डोगरगांव, कसडोल, बिलईगढ़ सरायपाली के माननीय विधायकों को भी मांग पत्र सौपा जा चुका है कि सचिवालय स्तर पर बिना किसी लिखित आदेश के संस्कृत विषय के स्थान पर नवीन व्यावसायिक शिक्षा मौखिक निर्देशों से ही लागू किया गया है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा भी संस्कृत भाषा को अध्ययन एवं व्यवहार में अपनाने हेतु निरंतर अपील की जा रही है। केंद्र सरकार के द्वारा विद्यालयों में केवल ट्रेड चालू करने कहा गया है ना कि किसी विषय को नुकसान पहुंचा कर उनके जगह पर छत्तीसगढ़ में संस्कृत हिंदी बांग्ला और अंग्रेजी भाषा को जिसमें छात्र अध्यनरत थे को छोड़कर प्राचार्य और अधिकारियों के मौखिक निर्देश पर छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रम में जा रहे हैं संस्कृत हिंदी बांग्ला भारतीय संविधान में सर्वोच्च स्थान प्राप्त आठवीं अनुसूची की भाषा है इस भाषा का अपमान और उल्लंघन असंवैधानिक एवं दण्डनीय अपराध है तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है यह भारतीय ज्ञान परंपरा संस्कृति सभ्यता और संस्कार परक राष्ट्रभाषा है। संघ के पदाधिकारी ने 8 फरवरी 2026 रविवार को माननीय उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा जी, गजेंद्र यादव जी, नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत जी और विधानसभा अध्यक्ष माननीय डॉ रमन सिंह जी से मुलाकात कर मांग पत्र सौपा गया.एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रही है अपने देश के विद्यालय महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं और अपने ही देश में प्रदेश में संस्कृत विषय को पाठ्यक्रम से हटाने के लिए इस प्रकार महाषड्यंत्र चल रहा है जो गंभीर चिंतन का विषय है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कहीं पर भी ऐसा नहीं लिखा है की संस्कृत विषय के जगह पर या उनके विकल्प के रूप में नवीन व्यावसायिक शिक्षा पढ़ाया जाए, 7 सितंबर 2025 को सरयू पारिन भवन में आयोजित विराट् संस्कृत विद्वत् सम्मेलन में उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह जी को भी मांग पत्र सौपा जा चुका है। 25 अगस्त 2025 को माननीय शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एस.सी.ई.आर.टी रायपुर को कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं तक संस्कृत विषय को अनिवार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है, परंतु उस निर्देश का कार्यपालन धरातल पर आज पर्यंत नहीं किया गया है।हाई स्कूलों में जहां छात्र अध्यनरत हैं दस बारह वर्षों से पदस्थ एकल संस्कृत शिक्षकों को अतिशेष अथवा पद रिक्त नहीं है करके एक तरफा अन्यत्र स्थानांतरित कर अधिकारियों के द्वारा छात्रों के अध्ययन अध्यापन को भी बाधित किया जाता रहा है।
