अयोध्या के कृषि उत्पाद दल ने रबी दलहन अनुसंधान कार्य का निरीक्षण किया

बताया गया- कांकेर जिले के लिए जल्द ही मसाले वाली जीनोप्लास्टी

 कांकेर – इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र सिंगारभाट कांकेर में चल रहे रबी शोध कार्य का निरीक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उच्च वैज्ञानिक दल ने किया। निरीक्षण दल में अनुवांशिकी एवं पादप जन्म के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शिवनाथ, पादप रोग विज्ञान के डॉ. पंकज, कीट वैज्ञानिक डॉ. सुभाष चंद्रा एवं डॉ. वैभव कुमार सोनी शामिल थे।

अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के वार्षिक पर्यवेक्षण कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के कृषि कृषकों के दल ने कांकेर के लिए प्रारंभिक इंजीनियर्स वाली जीनोटाईप को उपयुक्त बताया जो कि धान के खेत के खाली होने पर संभव हो सके। इसमें सर्वश्रेष्ठ जीनोटाइप का चयन करके चित्र के रूप में विभाजित किया गया है। वरिष्ठ वैज्ञानिक शिवनाथ ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिससे भविष्य में शोध कार्य और अच्छे कार्य किए जा सकें। डॉ. सुभाष चन्द्रा फ्रैगमेरिया, पित्त और प्लास्टर रोट के चने के शोध में कुछ उपचारों में लक्षण पाए गए और विकृति उपचार के लिए इसके निदान के बारे में बताया गया। अखिल भारतीय अनुसंधान परियोजना ए.वी.टी. एवीटी चना समय पर ज्योतिष, एवीटी चना समय पर ज्योतिष, एवीटी चना देर से, एवीटी चना, एवीटी चना, एवीटी मसूर प्लांट एवीटी चना फसल की वर्तमान स्थिति विशेष रूप से तालाब निर्माण फली बनने की स्थिति का संबंध में जानकारी दी।

केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. लाइफ सलाम ने कहा कि कांकेर क्षेत्र की जलवायु दल्हनी सीमा के लिए काफी उपयुक्त है। इस शोध के सफल परिणाम आने वाले समय में नाव में सवार किसानों के लिए अधिक उपजी बेचने वाली और अलमारियों से नाव में दल्हनी अपार्टमेंट की नई दुकान के दरवाजे खुल जाएंगे। कृषि वैज्ञानिक श्री थलेश कुमार, श्री प्रदीप कुमार गंजिर, डॉ. जागृति पटेल, डॉ. प्रदीप कुमार बढ़ई ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में इस केंद्र पर 06 महत्वपूर्ण अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान संचालित किए जा रहे हैं।