27 दिन तक ग्राहकों की देखभाल से नन्ही जान को मिला नया जीवन

कोंडागांव – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के दूरदर्शन विजन के क्षेत्रीय प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे अब जिला मुख्यालयों पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इसी का जीवंत उदाहरण जिला अस्पताल कोंडागांव की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) में देखने को मिला, जहां एक गंभीर नवजात शिशु का नया जीवन मिला है।

डॉक्टर छात्रा नुपुर राइस पन्ना के सतत निदेशक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर. के. चौधरी के दिशानिर्देश और सिविल इंजीनियर्स सह मुख्य अस्पताल डॉक्टर डॉ. प्रेमलाल मंडावी के नेतृत्व में जिला अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं लगातार बाधित हो रही हैं। आवश्यक है, जीवन रक्षक सामुहिक एवं स्टूडियो की स्माइक और नियमित मॉनिटरिंग के कारण आज एसएनसीयू के दूरस्थ जिलों के लिए आशा की किरणें बनी हैं।

ग्राम राकसबेड़ा, विकासखंड मकड़ी निवासी बो सुखदाई मरकाम एवं चौतराम मरकाम के नवजात शिशु का जन्म 18 दिसंबर 2025 को शाम 5रू28 बजे हुआ। जन्म के तुरंत बाद शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई। 20 दिसंबर 2025 को एसएनसीयू में बच्चों की भर्ती की गई। जन्म के समय शिशु का वजन 2.70 था और वह बर्थ एस्फिक्सिया, लगातार यात्रा और संक्रमण जैसी जटिल समस्याओं से जूझ रहा था। गर्भावस्था के दौरान माता में गंभीर ऑलिगो हाइड्रामेनिओस की स्थिति भी पाई गई थी।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रुद्र कश्यप, डॉ. बॅल एवं डॉ. राजेश परोमिता सूत्रधार सहित एसएनसीयू की टीम ने बच्चों का प्राथमिक उपचार शुरू किया। शुरुआती दिनों में ऑक्सीजन सपोर्ट और एंटीबायोटिक दिए गए थे, लेकिन 12 दिनों तक गहन निगरानी में रसायनिक चिकित्सा जारी रही।

शिशु के उपचार के दौरान सेप्सिस एवं गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग जैसी पाइपलाइन की पहचान हुई। रेज़्यूमे टीम ने उच्च श्रेणी के एंटीबायोटिक्स से तैयारी की और आवश्यकता के अनुसार फ्लुकोनाज़ोल प्रदान किया। बार-बार आने वाले दौरों को नियंत्रित करने के लिए फेनोबार्बिटोन/फेनोइन उपचार दिया गया। इस नन्हें जान को सुरक्षित रूप से रखा गया।

लगातार 18 दिनों तक गहन उपचार के बाद शिशु गृह की स्थिति में सुधार लाया गया। 19 वें दिन से 10 दिन पहले कंगारू मदर केयर (केएमसी) की शुरुआत स्थिर रही, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। लगभग 27 दिनों की प्रारंभिक अवस्था में शिशु को पूर्णतः स्थिर अवस्था में अवकाश प्रदान किया गया।

प्रदेश सरकार की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अब जिला स्तर पर ही उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं, जिससे तटीय क्षेत्रों के नागरिकों को महानगरों की ओर जाने की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है। जिला अस्पताल के एसएनसीयू की व्यवस्था के लिए रजिस्ट्रार द्वारा समय-समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं और सतत निगरानी भी की जा रही है। उल्लिखित प्रकरण जिला अस्पताल के यूनिट की नवजात शिशु की बेहतर देखभाल और सेवाओं एवं टीमवर्क का उदाहरण है।