
संभाग प्रमुख
मोहम्मद इकरार अहमद।
सरगुजा/मनेंद्रगढ़ – भीषण गर्मी शुरू होते ही सरगुजा संभाग के कोरिया वासियों के सामने शुद्ध पेय जल संकट गहराने लगा है। और विपक्ष खामोशी की चादर ओढ़ कर मौन है, जहां की जनता अब कोरोनावायरस संक्रमण जैसी ख़तरनाक जानलेवा बीमारी से कम और दूषित जल संकट से ज्यादा ग्रसित है, विपक्ष में बैठी भाजपा का अब इस राजनीति से भी कोई सरोकार नहीं है, ऐसे में जनता अब किसके सामने अपना दुखड़ा सुनाए? सवाल यह नहीं कि सत्ता पर किसका कब्जा है? सवाल है कि विपक्ष की भूमिका क्या है?

जिले की पूरी जनता शुद्ध पेय जल संकट से त्राहिमाम है और कोरिया में जल संकट का मुद्दा भी काफी पुराना है। जिसे देखते हुए कोरिया के राजाओं ने भी जल आपूर्ति संकट के निपटारे के लिए कई जलाशय, बांध बनवाए। पर जल संकट की समस्या जस की तस है। कोरिया में जल संकट गहरा प्रभाव डाल रहा है और विपक्षी दल मौन है, जहां की जनता अब कोरोनावायरस संक्रमण जैसी ख़तरनाक जानलेवा महामारी से कम और दूषित जल संकट से ज्यादा ग्रसित हो चुकी है। ऐसे में विपक्ष की भूमिका निभा रहे दलों को आगे आना चाहिए। लेकिन राजनीतिक रोटियां सेंक रहे विपक्षी दलों को भी इन सब बातों से कोई सरोकार नहीं है जनता जाएं भांड में, पानी का कौन सा तेल निकलना है? पंद्रह साल के कुशासन के बाद मुंह की खाई भाजपा को कोरिया की जनता से अब कोई लाभ नहीं है। जिसका फ़ायदा सरकार उठा रही। और जनता के समक्ष विकट जल संकट की स्थिति निर्मित है। जिसका हल स्थानीय दलों के लोग भी ढूंढ रहे हैं। बता दें कोरिया में विकट गंभीर जल संकट की कहानी कोई, नई, नहीं है। शुरू से ही कोरिया वासी इस विकराल जल संकट से उभरने की कोशिशों में लगे हैं पर वहां बैठी सत्ता रूढ़ व विपक्षी दलों को इन सब बातों से कोई सरोकार नहीं है। वहीं दूसरी तरफ प्रशासन की लापरवाही जनता को और मार रही है, प्रशासनिक लापरवाही का दंश झेल रहे ग्रामीणों ने बताया कि मनेन्द्रगढ़. नगर पालिका द्वारा इंटक वेल में जमें मलबे की सफाई के लिये एनीकट का गेट खुलवाया गया और फिर गेट पूरा बंद नही हुआ तो उसका जलस्तर काफी नीचे चला गया। ऐसे में अब नगर पालिका की लापरवाही से शहर के लेागों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। वहीं बरकेला डेम से पानी लेने के लिये लगभग 25 लाख रूपये से अधिक की राशि खर्च करनी होगी, आखिर यह किसकी जवाबदेही होगी। इस संबंध में कलेक्टर कोरिया को बीजेपी मंडल अध्यक्ष धर्मेन्द्र पटवा, मंडल महामंत्री रामचरित द्विवेदी, महामंत्री संजय गुप्ता समेत अन्य पदाधिारीगण व नागरिकों ने संयुक्त ज्ञापन प्रेषित करते हुये मामले की उचित जांच कर दोषियों पर त्वरित कार्यवाही की मांग की है। कलेक्टर को प्रेषित ज्ञापन में उल्लेखित किया गया है कि नगर पालिका प्रशासन द्वारा एनीकट के संधारण में काफी लापरवाही बरती गई है जिसके चलते शहर के लोगों को एक बार फिर से गंदा पानी पीने के लिये मजबूर होना पड़ेगा। कोरिया के जानकार वासियों ने आरोप लगाते हुये कहा है कि चैनपुर एनीकट में जमा पानी के बह जाने के कारण अब जल संसाधन विभाग के बरकेला डेम से लगभग 25 लाख रूपये खर्च कर पानी लेना पड़ेगा। साथ ही साथ लगभग तीन महीने तक बरकेला डेम से लेकर इंटकवेल तक कर्मचारियों को लगाना पड़ेगा। साथ ही 7 किमी नाली का चैनल व बोरिंग लगाकर स्थाई डेम बनाना पड़ेगा। इतनी लंबी प्रक्रिया के बाद मनेन्द्रगढ़वासियांं को पीने का पानी मिल सकेगा। वहीं परिषद् के कुछ जिम्मेदार अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि बारिश कम होने की वजह से डेम में पर्याप्त पानी जमा नही हो सका। जबकि कृषि विभाग के आंकड़ों में साफ उल्लेखित है कि इस वर्ष जिले में सर्वाधिक वर्षा मनेन्द्रगढ़ में हुई है। डेम का पानी सूखने के बाद अब अपनी लापरवाही छुपाने के लिये नगर पालिका के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि गलत बयानबाजी कर शहर की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि सभी जानते हैं कि जिला जलावर्धन योजना के तहत् चैनपुर में हसदेव नदी में 6 करोड़ की लागत से एनीकट का निर्माण कराया गया था, लेकिन नगर पालिका परिषद् की बड़ी लापरवाही के कारण एनीकट का गेट बंद नही किया गया जिसके चलते डेम में पानी का जमाव पर्याप्त नही हो पाया।
एक ओर समूचा विश्व कोराना महामारी से जूझ रहा है ऐसे में डेम से पानी लाकर शहरवासियों को पिलाने में लगभग 25 लाख रूपये से अधिक की राशि खर्च होगी, यह किसकी जिम्मेदारी होगी. इस संंबंध में पीएचई के अधिकारियों ने नगर पालिका परिषद् के जिम्मेदार लोगों को पूर्व में ही गेट बंद करने के लिये समझाईश दी थी लेकिन फिर भी गेट लाक नही किया गया और लगातार जल रिसाव होता रहा। जिससे अब आने वाले समय में पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। कुछ दिन पूर्व खांडा जलाशय में भी रिसाव होने की जानकारी ग्रामीणों ने प्रशासन को दिया था लेकिन प्रशासनिक लापरवाही से खांडा जलाशय फुट गया को आज भी बनने की राह देख रहा है। जहां ग्रामीण को काफी परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है।
