जिले के 133 स्कूलों से एकल शिक्षक को हटा दिया गया, अन्य शेयरधारकों को मंजूरी दे दी गई, अब केवल 37 को हटा दिया गया है
111 वैज्ञानिकों को गणित-विज्ञान के शिक्षक मिले
सात बिना शिक्षक वाले तकनीशियनों में भी रेस्तरां की कार्यशाला हुई
दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में सचिवालय की स्थापना से लेकर पालकों और बच्चों तक की खुशियां
धमतरी – धमतरी जिले में सबसे अधिक फ़ायदा एक शिक्षक वाले रसोईघर को हुआ है। ऐसे 170 स्कलों में से 133 स्कलों में अतिरिक्त शिक्षक मिल गए हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र में शिक्षक विक्सन और एकल शिक्षक शाला से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा था। वह अब इंस्टालेशन को पद से दूर करने जा रही है। धमतरी जिले में बिना शिक्षक वाले तीन प्राथमिक और चार मध्य विद्यालय के शिक्षक पद की स्थापना हो गई है। इसके साथ ही 111 उच्च और शिक्षक शिक्षण को गणित और विज्ञान विषयों के शिक्षक भी मिल गए हैं। इससे इन शालाओं में शैक्षणिक माहौल सबसे अच्छा होगा।राज्य शासन के दिशा निर्देश- जिले में स्थित अतिशैक्षणिक संस्थानों के चित्रों की पूरी प्रक्रिया अलग-अलग जिलों के क्षेत्रों में मौजूद शिक्षक विकसन और एकल शिक्षक शिक्षा को अब केवल नए शिक्षक नहीं मिले हैं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा भी सुनिश्चित हुई है। जिले के सुदूरवर्ती वनांचल क्षेत्र के बच्चों को टीचर्स की कमी के कारण पढ़ाई में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। शिक्षक नहीं होने से बच्चों का भविष्य अधर में था। लेकिन आज युक्तियुक्तीकरण के माध्यम से शिक्षक मिलन समारोह से बच्चों के भविष्य को लेकर आशा की एक नई किरण नजर आ रही है। इससे बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी।युक्तिकरण से पहले जिले के मैदानी जंगलों में दर्ज संख्या के अनुसार मानव से अधिक शिक्षक तंबू थे और अन्य जंगलों के ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों की दर्ज संख्या के अनुसार मन शिक्षक अध्यापन कार्य में शिक्षक की स्थिति नहीं थी। टीचर्स के इस असंतुलित वितरण से कई कोचिंग में बच्चों की पढ़ाई पर काफी नकारात्मक असर पड़ रहा था। गणित- विज्ञान, रसायन विज्ञान, फिजिक्स, बायोलॉजी विषय के साझीदार की साख नहीं होने से विद्यार्थियों को इन विषयों पर पकड़ बनाने में परेशानी होती थी। जिला प्रशासन ने इसे युक्तियुक्तकरण के माध्यम से दूर करने का काम किया है।
कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा ने कहा कि जिले के 111 पुरातत्वविदों में गणित के शिक्षक नहीं थे, ऐसे विद्वानों के अनुसार विषय शिक्षक नियुक्त किये गये हैं। युक्तियुक्तकरण से तटीय क्षेत्र जैसे दक्षिण मगरलोड नगरी विकासखंड और डूबान क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा निगम की कमी को पूरा कर समाधान किया गया है। उन्होंने कहा कि खुशी की बात यह है कि युक्तियुक्तकरण ने सभी प्लांटों को अपने-अपने घरों में रख लिया है। इन रियल एस्टेट में असोसिएट्स से क्षेत्र के राच्यपाल पालको और नामांकित बच्चों में उत्साह है। बच्चों की पढ़ाई में जो समस्या थी, अब उन्हें मिलेगी राहत। साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आये।
अतंग प्राइमरी स्कूल में 121 बच्चों पर केवल दो टीचर, अब तीन नए और मिले, संख्या पाँच हुई
विकासखंड कुरुद मुख्यालय से 4 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत अटांग के शैक्षिक प्राथमिक शाला प्रेमनगर अटांग में 121 बाल अध्ययनरत है। पिछले वर्षों में कुल मिलाकर दर्ज संख्या में केवल दो शिक्षक, एक प्रधान पाठक और एक सहायक शिक्षक शामिल हैं, जिनमें स्थानीय व्यवस्था में वैकल्पिक संकाय के सिद्धांत विद्यालय में अध्यायन कार्य शामिल हो रहे थे। भारी प्रयास के बाद भी बच्चों की पढ़ाई में गुणवत्ता प्राप्त करना कठिन था। जिस कारण शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों, सरपंचों और पालकों द्वारा इंजीनियरों की मांग की जा रही थी। शासन द्वारा स्कूल में 3 नए सहायक संकाय पद की स्थापना की गई है। इसे दर्ज करें, संख्या के अनुपात में, आत्मनिर्भर शिक्षकों की सूची हो पाई है। युक्तियुक्तकरण से विद्यालय में शिष्या श्रीमती पार्वती बैडाल, श्रीमती दूज कुर्रे और श्रीमती लक्ष्मी मुदलियार ने नवप्राथमिक शाला प्रेमनगर अटंग में कृतिका ग्रहण किया। शासन के इस प्रक्रिया से शिक्षकों की बैठक में शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री उमेन्द्र साहू, उपाध्यक्ष श्री शिवकुमार साहू, सही अन्य एवं सहयोगी अभिभावकों ने प्रसन्नता व्यक्त की।
