शिक्षकों ने विभिन्न मांगों का ज्ञापन मंत्री को सौंपा।
महासमुंद – छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ प्रांतीय द्वारा शिक्षा समूह की बैठक पश्चात शासन से शिक्षा, शिक्षार्थी व शिक्षक हित में मांग की है। प्रदेश के 80% शालाएं प्राचार्य विहीन है। इसी प्रकार प्रधान पाठक व्याख्याता पद पर अविलंब पदोन्नति दी जाए l संगठन की ओर से बताया गया कि शालाओं का युक्ति युक्तिकरण किया जा रहा है। लेकिन, संस्था प्रमुख के संबंध में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। क्योंकि एक ही शाला में दो संस्था प्रमुख नहीं हो सकते यह घोर आपत्तिजनक है। संगठन ने कहा कि शिक्षकों के युक्ति युक्तिकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए सभी संवर्ग को पहले पदोन्नति दी जाए एवं वर्ष 2008 के सेटअप व वर्ष 2010 के युक्तियुक्तकरण के मार्गदर्शक बिंदुओं को आधार मानकर अतिशेष शिक्षकों का युक्ति युक्तिकरण करना उचित होगा। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी राशि 20 लाख को बढ़ाकर 25 लाख किया जाए। साथ ही 240 दिन के अर्जित अवकाश नगदी करण राशि को बढ़ाकर 300 दिन का किया जाए। पूर्व माध्यमिक प्रधान पाठकों जिनका 10 वर्ष सेवा पूर्ण हो चुका है, उन्हें समय मान वेतन दी जाए। इसी प्रकार शाला संचालन पूर्ववत 10 से 4 बजे हो एवं शिक्षकों को मोबाइल भत्ता जैसे प्रमुख मांगों को लेकर स्कूल शिक्षा सचिव एवं संचालक लोक शिक्षण संचालनालय को ज्ञापन सौंप कर शिक्षक हित में निर्णय लेने की बात की गई। उप प्रांताध्यक्ष टेकराम सेन ने बताया कि शिक्षा समूह की बैठक में सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने शिरकत करते हुए प्रदेश में शिक्षा व शिक्षक हित की बात की। बैठक में प्रमुख रूप से प्रांत अध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर, कार्यकारी प्रांत अध्यक्ष उमेश भारती गोस्वामी, प्रांतीय पदाधिकारी भुवनलाल सिन्हा दुर्ग शामिल होते हुए शिक्षा व शिक्षा के विकास में शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा की। उप प्रांताध्यक्ष टेक राम सेन बताया कि छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ प्रांतीय इकाई द्वारा सेवानिवृत्ति उपरांत सत्र समाप्ति तक शिक्षकों के पुनर्नियुक्ति सहित प्रशासनिक पदों में कनिष्ठ के बजाय वरिष्ठों को नियुक्ति दी जाने की मांग प्रमुखता से की गई है। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ का शिक्षा समूह में प्रतिनिधित्व एवं प्रमुख मांगों के लिए महामंत्री मनोज राय, कोषाध्यक्ष गया राम राजवाड़े सहित प्रांतीय पदाधिकारी ने शुभकामनाएं देते हुए शासन से मांग की है कि उक्त सभी मांगों को पूर्ण कर शिक्षक हित में निर्णय ली जावे।
