मंच को नमन
दिन-रविवार
दिनांक-25.04.2021
विधा-कविता
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विषय-कोरोना ने मचाया हाहाकार
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पूरी दुनिया बेताब हैं हर मन में सवाल हैं
कैसा ये मंजर हैं मचा हुआ हाहाकार हैं
आखिर क्या तोड़ हैं कहाँ इसका हल हैं
दर्द और भय का ही हर तरफ माहौल हैं
मौत के आगोश में जूझ रही जिंदगी हैं।
चीख हैं कहीं मायूसी हैं कैसी ये घड़ी हैं
दुआ, इबादत तो कहीं सजदे का दौर हैं
हर लम्हा अनजाना सा कहीं तो ख़ौफ़ हैं
महामारी शायद कुदरत का ही कहर हैं
बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी हो गये हैरान है।
चंद ऑक्सीजन को जिंदगी मोहताज हैं
शायद इंसानों की भूल का ये परिणाम हैं
प्रकृति से खिलवाड़ का भी तो असर हैं
धन-दौलत ये महल अटारी सब बेकार हैं
बीमारी का मिल गया हवा में ही जहर हैं।
बहुत ही गमगीन और नाजुक ये दौर हैं
किसी से भी नहीं रखना कोई अब बैर हैं
जरूरतमंदों का सहयोग करना जरूरी हैं
तकलीफों को समझे गर्दिश का शोर हैं
मास्क, दूरी,सेनेटाइज सुरक्षा के उपाय हैं।
घर की दहलीज अभी पार नहीं करना हैं
पीड़ितों को अपनेपन के मरहम लगाना हैं
स्नेह,करुणा,मीठे बोल संजीवनी बूटी हैं
इंसानियत दिखाना ही समय की मांग हैं
जीतकर दिखाना हैं कोरोना को हराना हैं।।
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प्रेषक,
कवयित्री
सरोज कंसारी
नवापारा राजिम
जिला-रायपुर छ.ग.
