लघु कथा
*भय*
जीवक भोर में उठकर रोज की तरह ड्यूटी में चला गया । मोबाइल की घंटी बजने पर जीवक ने मोबाइल हाथ में लिया और कान से चिपकाते हुए कहा- ” हैलो !”
बाहर से आवाज आई । “हैलो भैया! आपको कुछ लग तो नहीं रहा है?”
” मुझे तो कुछ नहीं लग रहा है ।”
थोड़ी देर बाद “पापा ! आपका स्वास्थ तो ठीक है ?”
“मैं बिल्कुल ठीक हूं बेटा! कैसे पूछे?”
” ऐसे ही पूछ लिया पापा!”
पांच मिनट बाद पुनः मोबाइल की घंटी बजी । जीवक मोबाइल देखा तो स्क्रीन पर पत्नी जानकी का फोन था।
” राहुल के पापा! आपका तबीयत तो ठीक है ? कहीं चक्कर तो नहीं आ रहा है?”
“मैं स्वस्थ हूं। मुझे क्या होगा? मैं तो ऑफिस में बैठे-बैठे काम कर रहा हूं। तुम लोग बार-बार तबीयत पूछते हो, कोई बात हुई क्या ? साफ-साफ क्यों नहीं बताते?”
“वो क्या है न…! आपके जाने के बाद आपके बिस्तर में…!”
“बिस्तर में…!”
“अरे बिस्तर में क्या हुआ?”
“कोबरा सांप पाया गया ।”
“सांप…. सांप… सांप …!” कहते हुए जीवक को अटैक आ गया और कुर्सी पर बैठे- बैठे ही लुढ़क गये।
*शिक्षा* -सत्य घटना पर आधारित लघु कथा है। नाम बदल दिया गया है ।जीवक न सर्प देखा न ही उसे सर्प ने कांटा। सर्प के नाम लेते ही भय से शरीर में विष बन गयाऔर दिल का दौरा पड़ते ही यमलोक सिधार गए । हमें किसी के नाम से चाहे हमारे को माने गये दुश्मन हो या जानलेवा बीमारी डरना नहीं है बल्कि हर परिस्थिति में सावधानी बरतना है और जमकर उससे मुकाबला करना है।

लेखक
*दिनेंद्र दास*
कबीर आश्रम करहीभदर
अध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद् तहसील इकाई बालोद,
जिला – बालोद (छत्तीसगढ़)
मो. 85648 86665
