कोरोना से जंग में आत्मविश्वास, आत्मबल,आत्मसंयम और धैर्यता है जरूरी:- सन्तोष पूरी गोस्वामी

कोरोना से जंग में आत्मविश्वास, आत्मबल,आत्मसंयम और धैर्यता है जरूरी:- सन्तोष पूरी गोस्वामी
जामगांव(फिंगेश्वर):- नगर पंचायत फिंगेश्वर के वार्ड क्रमांक 04 के स्वतंत्र पार्षद,तहसील राजिम, उपतहसील फिंगेश्वर के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं नोटरी संतोष पूरी गोस्वामी कोरोना से जंग जीतकर पूरी तरह से स्वस्थ हो गये है, और अपने कार्यक्षेत्र में वापस लौट चुके है, वापस आने पर उन्होंने कोरोना संक्रमण से जीतकर लौटने की अपनी आप बीती की कहानी,खुद की जुबानी में बताई।
श्री गोस्वामी ने बताया कि 31 मार्च को उन्हें सामान्य लक्षण महसूस होने पर अपना कोरोना टेस्ट करवाया,जिसकी एंटीजन रिपोर्ट तो निगेटिव आयी किन्तु 2 तारीख को जो आर टी पी सी आर की रिपोर्ट आयी उसमे मैं कोरोना पॉजिटिव निकला, पॉजिटिव होने की खबर मोबाइल में मेसेज के द्वारा मिलते ही मैं थोड़ा असहज हो गया,और मेरी दिल की धड़कनें असामान्य हो गयी, चूंकि मेरे अंदर कोरोना वायरस के शुरुआती लक्षण ही दिखाई दिये थे इसलिये डॉक्टरों से सलाह लेकर और दवाई लेकर मैंने अपने आप को होम आइसोलेशन में रखा,और उसकी अनुमति भी मुझे स्थानीय प्रशासन से मिल गई। घर मे आइसोलेट रहते रहते कई बार मेरे मन मे नकारात्मक विचार आये,कभी लगा कि इस बिमारी से मुझे और मेरे परिवार को कोई नुकसान तो नही हो जाएगा,लेकिन मैंने बिना डरे और घबराये खुद को समझाया और मन मे सोचा कि यदि बगैर डरे पूरे आत्मसंयम,आत्मबल, आत्मविश्वास और धैर्यता के साथ डट कर यदि इस महामारी का सामना किया जाये तो,इस भीषण आपदा से जीत पक्की है। घर पर ही रहकर मैंने नियमित रूप से योग प्राणायाम किया व चिकित्सक की सलाह से उनके द्वारा दी गई दवाइयों का सेवन किया,सुबह-शाम अपना तापमान और ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहा,और भोजन में हरी सब्जी भाजी जिसमे विटामिन और प्रोटीन ज्यादा होते है उसका सेवन किया,और पर्याप्त मात्रा में बिना किसी डर के भोजन करते रहा,प्यास लगने पर गुनगुने पानी,निम्बू का रस और श्री तुलसी युक्त पानी को पीते रहा व सरकार के द्वारा जारी आवश्यक कोरोना गाइड लाइन का पालन भी करते रहा।
अलग से कमरे में खुद को आइसोलेट करके खाना खाने के बाद बर्तन को खुद धोना, व अपने पहने हुवे कपड़ो को भी स्वयं धोना, परिजनों से सामाजिक दूरी बनाकर रखना इस दरम्यान बहुत जरूरी होता है,जो कि मैंने भी किया, 10 वे दिन के बाद 11 वे दिन मुझे फिर से कुछ आसामान्य से महसूस होने लगा तो मैंने तुरन्त अपने आप को गरियाबंद चिकित्सालय में भर्ती करवाया, वहा पर भी मुझे ये देखने को मिला कि ड्यूटी में लगे सभी डॉक्टर मरीजो को सकारात्मक सोच के साथ पूरे आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाते है व इलाज करते है,जिससे अधिक से अधिक मरीज तत्काल ठीक होकर वहा से वापस आ रहे है। कोरोना पॉजिटिव रहने के दौरान पूरे समय परिवार वालो,स्नेही स्वजनों के जो प्यार भरे सन्देश, प्रेरणा से भरे फोन कॉल आते थे उससे और आत्मबल बढ़ता था।
सकारात्मक सोच आवश्यक:- श्री संतोष पूरी गोस्वामी ने कहा कि अब वे पूरी तरीके से स्वस्थ होकर अपने कार्यक्षेत्र में वापस आ गये है। कोरोना से लड़ने के लिये अपने मन और मस्तिष्क का सकारात्मक होना आवश्यक है, नकारात्मक ऊर्जा हमे मौत की ओर ले जा सकता है, इसलिए सभी लोगों से मेरा निवेदन है कि जिनको पॉजिटिव आया है वो भी और जो सामान्य है वे भी पूरे सकारात्मक ऊर्जा के साथ आत्मबल और आत्मविश्वास की सीढ़ी बनाकर पूरी धैर्यता के साथ इस विषम परिस्थिति का सामना करे,घर मे रहे सुरक्षित रहे और यदि हो सके तो अपने घर मे रहते हुवे टी वी पर भक्ति चैनल और सन्तो के प्रवचन सुने। अंत मे उन्होंने गरियाबंद चिकित्सालय और फिंगेश्वर चिकित्सालय के सभी चिकित्सक और उनके पूरे स्टाफ का धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि यदि धरती में अभी सही मायने में भगवान है तो वो डॉक्टर ही है, और जिस निडरता के साथ ये सभी कोरोना महामारी को दूर भगाने में लगे हुवे है निश्चित ही आने वाले समय मे जल्द ही हमे सफलता प्राप्त होगी। फिंगेश्वर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. पी. कुदेशिया का भी मैं हृदय से आभार प्रकट करता हु कि वे भी इस संकट की घड़ी में अपना सब कुछ त्याग कर लोगो की सेवा में लगे हुवे है।