साहित्य समाज का दर्पण होता है

*साहित्य समाज का दर्पण होता है

राजिम,,कोरोना वैश्विक महामारी के कारण दुनियाभर में स्कूल,कालेज व पुस्तकालय बंद है और लोग अपना समय बाहर नही बिता रहे है,इसलिए यह समय लोगो के बीच संबंधों को मजबूत करने,दिमाग और रचनात्मक का उपयोग करके हमारे क्षितिज का विस्तार करने में पुस्तको की शक्ति का उपयोग करने का है। 23 अप्रैल को पूरे विश्व के लोगो के द्वारा हर वर्ष मनाया जाने वाला विश्व पुस्तक दिवस एक वार्षिक कार्यक्रम है। 23 अप्रैल 1995 को पहली बार यूनेस्को द्वारा विश्व पुस्तक दिवस की शुरुआत की गई।विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए पूरन लाल साहू व्याख्याता (बिजली) ने कहा कि,,पुस्तकों का हमारे जीवन मे बहुत महत्व है।पुस्तक हमें संस्कार और ज्ञान देकर एक अच्छा इंसान बनाती है।साहित्य समाज का दर्पण होता है।पुस्तकों से मनुष्य को ज्ञान और शिक्षा मिलती है।उन्होंने आगे कहा कि पुस्तक हमे जीवन जीने की कला सिखाती है। ज्ञान कभी भी बेकार नही होता है।पुस्तक विभिन्न संस्कृतियों,पहचानों और भाषाओं के माध्यम से अपनी विशिष्टताओं को प्रकट करते हुए एक कहानी और एक सामान्य विरासत के आसपास लोगो को एक साथ लाती है।इसलिए पुस्तक हमारे लिए बहुत ही उपयोगी है और इनमें लिखी हुई हर बात जीवन के किसी न किसी पड़ाव में अवश्य काम आती है।*