विपक्ष में रहते कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन देने वाले सीएम साय आज मौन क्यों है?

धान खरीदी से दूर भाग रही भाजपा की साय सरकार : पूर्व विधायक

प्रमोद दुबे 

 महासमुंद – विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि सहकारी समिति कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से 14 नवंबर से होने वाली समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारी ठंडे बस्ते में चली गई है। संघ की तीन सूत्रीय जायज मांगों पर शासन आंखें मूंद कर बैठी है। उन्होंने कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर विष्णुदेव साय ने धान खरीदी के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा। अब खुद धान खरीदी से दूर भाग रही है। यह सरकार धान खरीदी नहीं करना चाहती। 15 दिन विलंब से धान खरीदी करने के बाद भी भाजपा की साय सरकार ने खरीदी की तैयारी नहीं की है।

चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस शासन के समय ढाई सौ करोड़ रुपए सोसायटियों को अनुदान दिया गया था। लेकिन, अभी सोसाइटी में आर्थिक भार पड़ रहा है। प्रदेश सरकार को सहकारी समितियों के कर्मचारियों के आंदोलन को समाप्त कर उनकी मांगों को पूरा करना चाहिए। कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में 72 घंटे के भीतर उठाव का नियम बनाया था। जिससे समितियों को सूखत का सामना नहीं करना पड़ता था। साथ ही पहले मार्कफेड के लिए 28 फरवरी तक समस्त धान के निपटान की बाध्यता थी। वर्तमान में इसे बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है। इससे धान खरीदी के बाद सूखत की समस्या आएगी। सूखत से समितियों को आर्थिक नुकसान उठाना होगा। भाजपा जो नई नीति प्रोत्साहन राशि को लेकर बनाई है, इससे प्रोत्साहन की राशि समिति और कर्मचारियों के पास जाने की बजाय सीधे संबंधित जलिा सहकारी बैंक शाखाओं में जाएगी। इससे भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा। चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में 14 नवंबर से धान खरीदी शुरु होनी है, लेकिन धान खरीदी करने वाली प्रदेशभर के 2,058 समितियों के लगभग 13000 कर्मचारी चार नवंबर से हड़ताल पर हैं।

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इसमें महासमुंद जिले के 133 समितियों के 182 उपार्जन केंद्रों में कार्यरत लगभग 700 कर्मचारी भी आंदोलन पर है। कर्मचारी संघ ने जो तीन सूत्रीय मांगें रखी हैं, इनमें पहला ये कि मध्यप्रदेश सरकार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी प्रत्येक समितियों को तीन-तीन लाख का अनुदान दिया जाए। दूसरा पुनरीक्षित वेतनमान और तीसरा ये कि सूखत का प्रावधान करते हुए प्रति क्विंटल 500 ग्राम की क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया जाए तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा के कमीशन की राशि समितियों को दी जाए। इन तीन मांगों में से दो मांगें वही है, जो कर्मचारी संघ ने 2021 में उठाई थीं। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे। वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। उस समय साय ने बघेल को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया था। वर्तमान में उनकी सरकार है और वे स्वयं मुख्यमंत्री हैं, फिर कर्मचारियों की मांगों को पूरा ना कर पाने का क्या कारण है, उन्हें बताना चाहिए।

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विपक्ष में रहते कर्मचारी हितैषी होने का ढोंग रचने वाले भाजपा नेताओं ने सरकार बनते ही कर्मचारी हित को दरकिनार कर दिया। और धान खरीदी में नए-नए नियम लादकर सहकारी कर्मचारियों की परेशानी और बढ़ा दी।