अधर्म हमेशा होता है परास्त,परेशान
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अंतरात्मा की आवाजें सुनो हे इंसान
इसके बिना अधूरा हमारा पूरा विज्ञान।।
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अज्ञानता ही बनाता मानव को नर से नरपशु
ज्ञान ही बनाता मानव को मानव नादान।।
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धर्मगुरु ही धर्म को विजय दिलाता है सदा
अधर्म हमेशा होता है परास्त,परेशान
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जीवन धरा प्रकाशित हो सूर्य समान
जब तक प्रभु पृथ्वी पर फूँकते रहेगें जान
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जिसनें की कद्र सजल की उनको सुनाता हूँ
आज सजल गाकर,कवि बनाते अपनी पहचान।।
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– गौरव राठौर
जाँजगीर छ.ग.

