लॉकडाउन में मनरेगा कार्य कराना न्यायोचित नही, छ.ग. सरकार प्रत्येक मजदूर परिवारों के खाते में राहत पैकेज के रूप में डाले 5000 रूपये – रोहित साहू
जिला पंचायत सदस्य रोहित साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि शहर एवं गाँवो में तेजी से बढ़ते हुए कोरोना महामारी को देखते हुए लॉकडाउन की स्तिथि में मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन एवं प्रशासन मनरेगा कार्य चालू करने के आदेश पर तत्काल रोक लगाए । कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन में सभी जगह कार्य बंद है लेकिन मनरेगा का कार्य चालू किया जा रहा है जिसमें मनरेगा कार्य में हजारों की संख्या में मजदूरी कार्य करने के लिए सभी मजदूर इकट्ठा होकर कार्य करेंगे, जिसमे सोशल डिस्टेंस और लॉकडाउन का पालन कर पाना मुश्किल है, पहले से ही प्रदेश के हॉस्पिटलों में मरीज के लिए बेड की कमी बना हुआ है ऐसे में और जोखिम लेना ठीक नहीं है। अभी की स्तिथि में प्रायः सभी गाँवो में कोरोना संक्रमित मरीज भारी संख्या में मिल रहा है गांव में कोई एक भी व्यक्ति संक्रमित रहता है और अगर अनजाने में भी कार्य स्थल पर सभी लोगो से संपर्क में आता है तो सभी लोगो की जान को खतरे में डालने वाली स्तिथि बन सकता है। आज ये कोरोना वायरस इतना खतरनाक तेजी से फैल रहा है कि पूरे विश्व में गहरे संकट की स्थिति में है जब शासन प्रशासन इतना भरसक प्रयास कर रहा है तो ग्रामीण अंचल में निवास करने वाले लोग अभी भी मनरेगा कार्य में जायेंगे और परिवार सहित कार्य करेंगे, शासन प्रशासन को इन लोगों की चिंता नहीं है क्या? जबकि शासन प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सभी जगह जिला स्तर पर लॉकडॉउन लागू है इस कारण शासन प्रसाशन मनरेगा कार्य चालू करके मजदूरों व उनके परिवार को जोखिम में मजदूरी करा कर मौत को चुनौती ना दे । रोहित साहू ने सरकार से मांग किया है कि जनहित में निर्णय लेकर सरकार मनरेगा कार्य चालू करने के आदेश को तुरंत गम्भीरता से पुनः विचार करते हुए निरस्त करे और मजदूरों के परिवार को ध्यान में रखते हुए भरण पोषण के लिए खाद्यान्न एवं सहयोग राशि राहत पैकेज के रूप में 5000 रूपये प्रत्येक मजदूर व गरीब परिवारों के खाते में तत्काल डालें, जिससे सभी घर में चूल्हा जल सके कोई भूखा ना रहे, राशन की व्यवस्था कर सके।
