बाल सुलभ मनोभावों की सुंदर अभिव्यक्ति बाल किशोर कहानी।
संग्रह– सुम्मी चिड़िया की सीख”। साहित्य सृजन करना,और साहित्य में जीना बिलकुल अलग बात है,बाल कहानीकार टिकेश्वर सिन्हा जी,इन बातों में यदि कोई मेल खाता है तो वह है ,साहित्य में जीना। सिन्हा सर जी वास्तव में साहित्य के लिए जीते हैं।चौबीस घंटे सिर्फ और सिर्फ साहित्यं के लिए समर्पित रहते हैं। इनके दूसरे पहलू…
