आज भी अपनी परम्पराओं को ज़िंदा रखे हुए बस्तर के आदिवासी, बीहड़ अंचलों में ढेकी और मुसल का आज भी होता है इस्तेमाल…
पखांजूर से बिप्लब कुण्डू-(29.4.21) पखांजूर आधुनिकता के दौर में हम भले ही चाँद पर पहुच चुके है। लेकिन उस गुजरे वक्त के जिन तौर तरीकों ने हमें आज इतना आधुनिक बनाया है उन तौर तरीकों को बचाने के लिए कुछ लोग आज भी जद्दोजहद कर ज़िंदा रखने की एक कोशिश कर रहे है। बस्तर हमेशा…
