प्रमोद दुबे
महासमुंद – छत्तीसगढ़ के रायपुर और महासमुंद जिले के बीच से गुजरने वाली जीवनदायिनी महानदी के दोनों किनारों पर दिन-रात रेत का अवैध उत्खनन चल रहा है। बताया जा रहा है कि, रेत की चोरी से खनिज और प्रशासनिक अफसरों को भी जानकारी है, लेकिन अफसर कुंभकर्णी नींद में हैं। महानदी तट को काट कर मिट्टी से रैंप बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। दरअसल, रायपुर के आरंग क्षेत्र से लगे गांवों के घाटों से प्रवेश कर महानदी से रेत खनन करने वाले अपने स्वीकृत स्थल को छोड़कर न केवल आरंग, बल्कि महासमुंद के कुछ हिस्सों से भी रेत का अंधाधुंध खनन कर रहे हैं। इसकी शिकायत भी कई बार अधिकारियों से की गई है। लेकिन खानापूर्ति करने कुछ चुनिंदा घाटों पर पिछले महीने रायपुर खनिज विभाग के उड़नदस्ता टीम ने महासमुंद पुलिस के साथ खड़सा में दबिश देकर 3 चैन माउंटेन और 2 हाइवा जब्त किया था। यह सभी रायपुर जिले के आरंग विधानसभा के ग्राम कुरूद रेत घाट के रास्ते महानदी में उतर कर ग्राम खड़सा से रेत का उत्खनन कर रहे थे। इसी तरह से ग्रामीणों के विरोध के बाद लखना और रावण से भी नयापारा तहसीलदार ने 4 चैन माउंटेन और 2 हाइवा को जब्त किया था। बावजूद इसके अन्य रेत घाट पर भी रेत की चोरी बदस्तूर जारी है। आरंग क्षेत्र के कई रेत घाट ऐसे हैं, जिसकी पर्यावरण स्वीकृति नहीं है, फिर भी रायपुर निवासी रोहित सिंघानिया के नाम पर मोहमेला (ए), बिलासपुर के सरोज नेताम- को मोहमेला (बी), बिलासपुर के रोहित खेड़िया को चिखली (बी), बिलासपुर के राजेन्द्र कुमार खेड़िया को चिखली (सी) और बिलासपुर के सुजीत सिंह के नाम पर राटाकाट रेत घाट है। इन 6 लोगों को टेंडर में मिले इन घाटों में अब तक पर्यावरण की- स्वीकृति नहीं मिली है। फिर भी पिछले तीन महीने से लगातार इन घाटों पर दिन-रात रेत उत्खनन हो रहा है। चिखली, कुरूद, कगदेही, हरदीडीह, राटाकाट रेत घाट जिनके नाम है,इन घाटों पर रसूखदार प्रशासन को चूना लगते हुए अवैध खनन कर रहे हैं। जिसमें मुंगेली निवासी कृष्णा कश्यप के नाम पर ग्राम कुरूद के दूसरे रेत घाट की लीज मिली है।
