शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम किया।

बिप्लब कुण्डू

पखांजूर-कांकेर :- छःग मातृभाषा बांग्ला एवं शिक्षा संग्राम समिति ने शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम किया।समिति अध्यक्ष अजित मिस्त्री,कार्यकरणी सदस्य महेश मण्डल, अनिमेष विश्वास,हिरेण्मय विश्वास, संजीत मिस्त्री,अलोक विश्वास,सुबल विश्वास ,निबास अधिकारी आदि वक्ताओं ने शरतचंद्र के जीवन संघर्ष पर बात रखें और शासन-प्रशासन से मांग किये है कि ऐसे महान साहित्यिक के मातृभाषा बांग्ला थे बांग्ला में उपन्यास लिखकर समाजीक दर्पण में समाज की वास्तविक चित्र को चित्रित कर तमाम शोषण अन्याय अत्याचार जूल्मों के खिलाफ लड़ने और शोषण से मुक्ति और शोषण मुक्त समाज निर्माण करने को प्रेरणा का श्रोत आज भी उनकी उपन्यासों की पात्रों के माध्यम से अन्याय के खिलाफ लड़ने को प्रेरणा दे रहा है।कार्यक्रम में प्रेरणा गीत की प्रस्तुति कल्पना चंद,ज्योत्सना अधिकारी, गोपाल सिकदार आदि ने प्रस्तुत किया।लीपिका मिस्त्री, रिता साना आदि ने कविता आबृति किया।वक्ताओं ने कहां कि शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय बंगाल के युवापीढ़ीओं को आजादी आन्दोलन की क्रांतिकारीओं को जान कुर्बान करने को प्रेरित किया जो पथेर दावी उपन्यास क्रांतिकारीओ के पास मौजूद रहता था क्रांति सफल करने हेतु महत्वपूर्ण साहित्य है।पथके दाबेदार उपन्यास को अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगा दिया। पहले यह बंग वाणी में धारावाहिक रूप से निकाला, फिर किताब की शक्ल में छपा तो तीन हजार का संस्करण तीन महीने में ख़त्म हो गया। उपन्यास देश कि कई भाषाओं में अनुवाद हुए हैं।उनके पुरुष पात्रों से उनकी नारी चरित्र अधिक ताक़तवर हैं। उनके उपन्यासों में नारी जिस प्रकार परंपरागत बंधनों से छटपटाती हैं, पुरुष और स्त्री के संबंधों को एक नए और उच्च आधार स्थापित किया है।उनकी रचनाएं दिल को छू जाती हैं। शरत साहित्य में हृदय के सारे तत्व समाजीक बुड़ाईओं के खिलाफ संघर्ष,कर शोषण,जूल्म आदि खत्म करने पर प्रकाश डाला है। पल्ली समाज में समाज का वास्तविक चित्र उभरे और समाज के सामने सवाल खड़े किये कि सामाजिक तमाम बुड़ाईओं को जड़ से उखाड़ फेकें बगैर समाज में सहि-सलामत निवास करने योग्य नहीं है।समाज ऐसे बने रहे तो शोषितों ,पीड़ितों की खून की आंसु थम नहीं सकती है।

शरतचंद्र ने उपन्यासों के साथ ही नाटक, गल्प और निबन्ध लिखे।समिति द्वारा 26सितंबर ईश्वरचन्द्र विद्यासागर के जन्मदिन पर मातृभाषा बांग्ला भाषा स्कूलों में पड़ाने ,छत्तीसगढ़ पाठ्यक्रम में बांग्ला भाषा को जोड़ने,छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम एवं माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर कि प्रकाशन में मुद्रित करें ।शासन द्वार बांग्ला पुस्तक मुफ्त मे वितरण करें। पहली से 12वी कक्षा तक बांग्ला पड़ाने हेतु पुस्तक ,लायब्रेरी,बांग्ला भाषा पड़ाने कि शिक्षकों कि नियुक्ति,अंक सुची में बांग्ला भाषा में परिक्षा परिणाम प्राप्त अंक जोड़ने हेतु ऑनलाइन एवं मार्कसीट में बांग्ला लिखे और जगह रखा जाए।आदि मांग पर आन्दोलन तेज करने की आम जनता से समिति अपील कियामानिक,प्रदीप,पलाश,सपना,आयूषी,बाशंती,सुधिर,सुखदेव,उत्तम,विष्णु,विप्लव आदि उपस्थिति रहे।