धरती के भार बोहइया।


नारायण के सेज बने तै,
शिव के कंठ हार कहाए|
वासुकी बन मंदराचल ल,
ता-ता थैया,नाच नचाए||

त्रेताजुग म सीरी राम संग,
लक्ष्मण बनके तेहा आए|
मेघनाथ ल सरग पठो के,
रावण कुल के नाश कराए||

द्वापरजुग म नंद बाबा घर,
बलदाऊ बनके तै आए|
कन्हैया के संग तै रहिके,
पापी मन ल मार भगाए||

शेषनारायण तोला कहिथे,
धरती के तै भार बोहइया|
तीन लोक चौदह भुवन म,
देवता मन हे जस के गवइया||
रचनाकार:-श्रवण कुमार साहू, “प्रखर”
शिक्षक एवम साहित्यकार, राजिम
(नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं–)