
राजिम :- आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था युवा शक्ति पर निर्भर रहेगी, जिस देश में युवाओं की संख्या अधिक होगी। भविष्य में वह देश सबसे शक्तिशाली होगा। भारतवर्ष नशे की लत से ग्रसित है जब तक युवा पीढ़ी अपना आदर्श रियल हीरो को छोड़कर रील हीरो सिनेमा के कलाकारों को मानेगी तब तक सुधार हो पाना मुश्किल है। उक्त बातें रत्नांचल जिला साहित्य परिषद के द्वारा आयोजित आलेख लेखन पर उभर कर सामने आया। विषय था नशा पान से नई पीढ़ी को कैसे दूर रखें। इस पर अपनी बात रखते हुए रत्नांचल जिला साहित्य परिषद के अध्यक्ष जितेंद्र सुकुमार साहिर ने आगे कहा कि फिल्मी कलाकार कमला पसंद खाने युवाओं को संदेश देते हैं और युवा उन्हीं को अपना आदर्श मानकर कमला पसंद खा रही है। युवाओं को अपना आदर्श चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुभाषचंद्र बोस, स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों को मानकर उनके बताए मार्ग पर चलकर भारतवर्ष का नाम रोशन करना चाहिए।
गरियाबंद के लेखक बीएल श्रीवास ने कहा कि पूरी दुनिया में नशे की लत एक गंभीर समस्या बन गई है इसमें किशोर वर्ग से लेकर युवाओं की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वर्तमान में नशा एक फैशन बन गया है। यदि युवा पीढ़ी गलत रास्ते पर जा रही हो तो निश्चित रूप से भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
कोपरा के गीतकार राधेश्याम सेन ने कहा कि नशा नाश का जड़ है यह समाज के लिए नासूर बन रहा है नई पीढ़ी का नशे की ओर रुझान क्यों बढ़ रहा है इसको समझना होगा। इसे मिटाने के लिए समाज और सरकार दोनों को आगे आने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि युवा पीढ़ी को धर्म अध्यात्म से जोड़ देना चाहिए ताकि वह ना भटके और अपनी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए अच्छे कार्यों की ओर उनका रुझान होता रहे।
प्रयाग साहित्य समिति राजिम के अध्यक्ष टीकम चंद सेन ने लिखा कि नशा पान केवल नशा ही नहीं बल्कि हमारे आर्थिक सामाजिक पारिवारिक जीवन में जहर घोलता है इससे आदमी आर्थिक रूप से कमजोर होता चला जाता है समाज में प्रतिष्ठा नहीं होती। परिवार के लोग भी उनको हेय दृष्टि से देखते हैं और येन केन प्रकारेण अपना जीवन बिताते हुए जब वह अंतिम पड़ाव में होता है तो अनेक बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। इसलिए नशा पान जैसे भयंकर कुचक्र से अपने आप को दूर रखें जीवन सुखमय होगा।
लोहरसी गांव के लोक कलाकार एवं कवि कमलेश कठलहा लिखते हैं कि नशापान एक गंभीर समस्या बन गई है खासकर युवाओं को अपने अंदर जकड़ रखा है इसके कारण समाज में विभिन्न प्रकार के अपराध चोरी डकैती दुष्कर्म जैसी घटनाएं घटती है। बर्बाद करने वाले यह पदार्थ आसानी से कहीं भी उपलब्ध हो जाते हैं। सोशल मीडिया से भी तरह-तरह के नशे से संबंधित वीडियोस आसानी से प्रसारित होते रहते हैं। सबसे बड़ी समस्या हमारे उन आइकन लीडरों से है जो नशे को सपोर्ट करते हैं। गुटखा जर्दा सिगरेट शराब इनका विज्ञापन टीवी एवं न्यूज़पेपर तथा अन्य माध्यमों से दिखाई देते हैं। युवा इनको देखकर आकर्षित होते हैं ऐसे प्रसारण पर अति शीघ्र रोक लगना आवश्यक है तभी युवा पीढ़ी को बचाया जा सकता है। शायर राजेश साहू राज कोपरा कहते हैं कि नशा पान आज के युवाओं को पतन की ओर ले जा रही है। अधिकतर युवा शराब के नशे में लत होकर बे समय मौत के मुंह में समा जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि नशा पान सामाजिक बुराई है जिससे छोटे-छोटे बच्चों के ऊपर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। नशा के कारण कम उम्र की महिलाएं अपने पति को खो देती है छोटे-छोटे बच्चे अनाथ की जिंदगी जीने मजबूर होते हैं। बूढ़े मां बाप के सहारे जीने जाते हैं। समाज को खोखला करने वाले इस बुराई के लिए सब को आगे आने की जरूरत है।
पांडुका के कवि पुरूषोत्तम चक्रधारी ने कहा कि आजकल गांव गांव में पिकनिक मनाने का रिवाज जन्म ले लिया है जहां चार यार मिल जाते हैं वही पार्टी मनाने का दौर चल पड़ा है इसके कारण नशीले पदार्थों का आसानी से कुछ ही दूरी में मिल जाते हैं। इससे माहौल लगातार बिगड़ रहा है।
साहित्यकार विजय सिन्हा बारूकन ने कहा कि हमारी नई पीढ़ी को नशा पान से कैसे दूर रखें इसके लिए सशक्त और सर्वोत्तम माध्यम शिक्षा है। इनके अलावा शराबबंदी किया जाए तथा अन्य नशीले पदार्थ की उपलब्धता को बंद किया जाए। नशा उन्मूलन करने की जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ पूरे समाज की है। प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर इसके लिए सामूहिक प्रयास करना चाहिए।
