सावन के पहले सोमवार को प्रयाग नगरी होगा शिव भक्तों से गुलजार।

राजिम :- सावन लगते ही प्रयाग नगरी राजिम में शिव भक्तों का जमावड़ा होता जा रहा है बड़ी संख्या में शिव को मानने वाले भक्तगण महादेव की पूजा अर्चना एवं जल अभिषेक के लिए उपस्थित हो रहे हैं। रविवार को तो सुबह से ही विश्व विख्यात बाबा कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में बड़ी भीड़ देखी गई समय के साथ साथ भक्तों की संख्या बढ़ती ही जा रही थी शाम को तो भीड़ और बढ़ गई। बताना जरूरी है कि धर्म नगरी राजिम शैव और वैष्णव भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र है। यहां न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि देश विदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बनाते हैं इन्हें प्रयाग की मान्यता प्राप्त है तीन नदियों का संगम है भगवान विष्णु स्वयं राजीव लोचन के रूप में विराजमान है। आदिदेव महादेव का ज्योतिर्लिंग माता सीता द्वारा बालू से निर्मित किया गया है। त्रेता युगीन इस शिवलिंग में साक्षात महादेव मिलते हैं इसी श्रद्धा के साथ भक्तगण बड़ी संख्या में उपस्थित होते हैं। श्रीमद्राजीवलोचन महत्तम ग्रंथ में कथा आती है कि एक राजा जिनके एक भी पुत्र नहीं थे वह पुत्र की कामना को लेकर बड़े-बड़े तीर्थों की यात्राएं की लेकिन कहीं भी पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई और उम्र ढलान पर थी। चिंतित राजा घूमते हुए कमल क्षेत्र पहुंचे यहां उपस्थित एक ऋषि ने उन्हें बिल्वपत्र महादेव में चढ़ाने का निवेदन किया। पति-पत्नी दोनों मिलकर एक सौ बिल्व पत्र अर्पित किया। परिणामत: उन्हें सौ पुत्र की प्राप्ति हुई। ऐसे ही अनेक चमत्कार भक्तों की श्रद्धा को प्रकट करती है।

55 कोस की दूरी पर है पांच शिवपीठ

प्रयाग नगरी की चारों ओर 55 कोस की दूरी पर 5 शिवलिंग स्थापित है जिन्हें पंचकोशी शिवपीठ की मान्यता प्राप्त है। पटेवा में पटेश्वरनाथ महादेव, चंपारण में चंपकेश्वरनाथ महादेव, बम्हनी में ब्रह्मकेश्वरनाथ महादेव, फिंगेश्वर में फणीकेश्वर नाथ महादेव, कोपरा में कर्पूरेश्वरनाथ महादेव का प्राचीन कालीन मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग मौजूद है। इनके अलावा त्रिवेणी संगम के आसपास अनेक शिव मंदिर श्रद्धा भक्ति एवं विश्वास की परिणिति है।

शिवलिंग पर चढ़ते हैं बिल्वपत्र हैं

बताया जाता है कि बिल्वपत्र शिव की ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और जैसे ही शिवलिंग पर इन्हें चढ़ाया जाता है तो इसमें कुछ ऊर्जा समा जाती है। बेल पत्र के अलावा दूध, दही, शक्कर, जल, सुगंधित तेल, धतूरा, इत्र, चमेली का फूल, शहद, मिसरी, गंगाजल, सरसों तेल, गन्ने का रस इत्यादि समर्पित करते हैं। इनके अलावा शिवजी में हल्दी नहीं चढ़ाया जाता। शिव को कनेर और कमल के अलावा लाल रंग के फूल प्रिय नहीं है कहती और केवड़ा के फूल चढ़ाने के लिए निश्चित किया गया है। कुमकुम और रोली भी नहीं लगाई जाती। शिव पूजा में शंख वर्जित किया गया है बताया जाता है कि भगवान विष्णु को शंख बहुत प्रिय है लेकिन शिव ने शंखचूर नामक असुर का वध किया था इसलिए शंख भगवान शिव की पूजा में नहीं फूंका जाता। इनके अलावा नारियल पानी तथा तुलसीदल भी वर्जित है।

शिव भक्तों ने चढ़ाया महादेव के ऊपर जल

प्रतिदिन शिवभक्त की संख्या बढ़ती जा रही है। रविवार को कांवड़ यात्रा के लिए लोग पहुंचे। गेरुआ वस्त्र पहने हुए भक्तों ने सबसे पहले बाबा कुलेश्वर नाथ महादेव में जल समर्पित किए उसके बाद त्रिवेणी संगम का जल लेकर अन्य शिव पीठ के लिए निकल गए। अब बोल बम के उच्चारण वाले शब्द सुनाई दे रहे हैं। तथा हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा प्रयाग नगरी गुलजार हो रहा है।