बीजापुर – बीजापुर भारत के आकांक्षी जिलों में से एक है, जो 2007 में एक अलग जिला बनने के बाद से लगातार प्रेरणा दे रहा है। जिले में स्वास्थ्य और पोषण के मामले में अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। व्यापक संदर्भ में स्वास्थ्य और पोषण के स्तर में सुधार के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारे समुदाय की महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाये। इसी के चलते कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा के निर्देशन में जिले की गर्भवती महिलाओं में गर्भकाल के दौरान होने वाली शारीरिक एवं मानसिक विकारों को नियंत्रित कर सुरक्षित प्रसव को प्रोत्साहित करने तथा स्वस्थ शिशु जन्मदर में वृद्धि करने के उदद्देश्य से छत्तीसगढ़ योग आयोग एवं युनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में जिले की गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष योगाभ्यास कार्यक्रम परियोजना का संचालन किया जाना है।

गर्भावस्था के दौरान योग की आवश्यकता-गर्भावस्था एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा बच्चे का जीवन मा के गर्भ में शुरू होता है और उस अवस्था तक आगे बढ़ता है जब बच्चे को बाहरी दुनिया में लाना सुरक्षित होता है। गर्भावस्था एक महिला के जीवन में व्यापक बदलाव लाती है। गर्भावस्था एक महिला की जीवन की एक बहुत ही कीमती और महत्त्वपूर्ण घटना है जहाँ माँ और बच्चे दोनों की पूरी देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। गर्भावस्था की योजना बनाने से पहले ही प्रसवपूर्व देखभाल, सुरक्षित गर्भधान के साथ-साथ एक स्वस्थ शीशु की डीलवरी में मदद करती है और गर्भवस्था के जटिलताओं को रोकती है गर्भधारण के क्षण से माँ का शरीर अपने अन्दर घोषित होने वाले नये जीवन को समायोजित करने के लिए कई तरह से बदलना शुरू कर देती है जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है और विकसित होता है, माताओं को शारीरिक और भावनात्मक रूप से दोनो को समायोजित करने की आवश्यकता होती है।

गर्भावस्था के समय महिला का शरीर कई प्रकार के परिवर्तनों से गुजरता है जो तनाव (शारीरिक एवं मानसिक स्तर पर) उत्पन्न करता है। योग के द्वारा गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ मन एवं स्वस्थ शरीर प्राप्त किया जा सकता है। गर्भावस्था में योग से शारीरिक शक्ति में उन्नति, लचीलापन, पैल्विक फ्लोर मांसपेशियों की ताकत एवं प्रसव के दौरान सहनशक्ति में वृद्धि की जा सकती है, जिससे सही तरीके से सांस लेने एवं प्रसव के दौरान आरामदायक स्थिति पाने में मदद मिलती है।

गर्भवती महिलाओं को योगाभ्यास से निम्नलिखित स्वास्थ्य सहायता प्रदान किया जा सकता है। तनाव को कम करना, उचित नींद प्राप्त करना, शक्ति को बढ़ाना, लचीलापन एवं पैल्विक क्षेत्र में मांसपेशियों को मजबूत करना, पीठ के नीचले हिस्से के दर्द को कम करना, मितली (उल्टी होने जैसी स्थिति) को कम करना, कार्पल ट्यूनल सिड्रोम को कम करना, सर दर्द को कम करना, प्रसव के पहले के खतरे को कम करना एवं प्रसव से पहले बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास को रोकने वाले खतरों को कम करना।
