आखिरी दिन में भी नौतपा ने खूब तपाया l 

राजिम :- 25 मई से शुरू नौतपा 2 जून तक लगातार नौ दिनों तक खूब तपाया है। सुबह 9:00 बजे के बाद घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था दोपहर में तो अधिकतर लोग घर में ही रहना पसंद करते थे इस दौरान पंखे कूलर तथा बिजली की खपत हुई है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक नौतपा का तपना मानसून के लिए अच्छा माना गया है। जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तब नौतपा की शुरुआत होती है। पारा 41 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुके हैं। सड़कों पर प्रचंड गर्मी को देखते हुए बिरानी देखने को मिली। शहर के व्यस्ततम मार्ग बस स्टैंड से महासमुंद मार्ग, गरियाबंद रोड, गौरव पथ एवं रायपुर रोड पर भी सड़कें सूनी रही। 2 दिन शुक्रवार को नौतपा के आखिरी दिन खूब तपाया है जिसके चलते सरकारी एवं प्राइवेट कार्यालयों में भी फरियादियों एवं काम कराने वाले लोगों की संख्या कम देखने को मिली। गर्मी को देखते हुए कई जगह पियाउ सेंटर खोले गए हैं यहां तक की गरियाबंद एन एच 30 मार्ग पर पियाउ सेंटर लगा दिए गए हैं। गर्मी में एक बूंद पानी भी मायने रखता है।

           भीषण गर्मी में संगम सुखा

एक और भीषण गर्मी पड़ रही है वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा कहे जाने वाली महानदी के साथ ही सोंडुर पैरी नदी सूख गई है नहाने के लिए पानी नहीं है यहां तक की जानवरों के पीने के लिए भी साफ पानी उपलब्ध नहीं है। नवागांव एनीकट पूरी तरह से सूख गए हैं। संगम एनीकट में बूंद भर पानी नहीं है। पितईबंद एनीकट में पानी की दरकार है। यही हाल रावड़ एनीकेट का भी है। इस नदी पर चार एनीकेट बना दिए गए हैं लेकिन किसी में भी पानी नहीं है अर्थात सरकार का करोड़ों अरबों रुपया गई भैंस पानी में कहावत को चरितार्थ कर रही है। जब एनीकट में पानी रोकना ही नहीं था तो फिर बनाया क्यों जनता यही प्रश्न सरकार से कर रही है। जानकारी के मुताबिक नौतपा के बाद गर्मी कम नहीं होगी अभी सूर्य देव अपने रौद्र रूप को कम नहीं किए हैं। नौतपा के बाद पंचक फिर अदरा उसके बाद मानसून के आगमन होता है। इस दौरान गर्मियां पड़ेगी। गर्मी के चलते हुए पंखे कूलर की डिमांड बढ़ गई है।