भोपाल-अवधेश पुरोहित।

भोपाल :- मध्यप्रदेश की सत्ता की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की कार्यशैली के चलते और सत्ता के अहम में प्रदेश के जनसंघ के जमाने के नेताओं की जो स्थिति हुई वह सभी जानते हैं लेकिन इसी के साथ ही ब्राह्मण नेताओं की जो दुर्गति सत्ता के अहम में उनकी की गई इससे भी सभी परिचित और चिंतित हैं वहीं शिवराज शासनकाल में जनसंघ के जमाने के भाजपा के सच्चे सेवकों ने मुख्यमंत्री को कार्यकर्ताओं में असंतोष के अवगत कराते हुए कई पत्र लिखे लेकिन उन सभी का एक ही जवाब मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया जिससे उनकी उपेक्षा हुई फिर भी वह पार्टी के सच्चे सेवक के रूप में आज तक पार्टी को समर्पित रहे यह भी सब जानते हैं कि शिवराज के कार्यकाल में ईमानदार नेताओं की कोई पूछ परख नहीं हुई और बेईमानों को हर कार्यकाल में उन्हें मंत्रीपद से नवाजा गया जबकि अजय विश्नोई, अनूप मिश्रा जैसे कई नेताओं की उपेक्षा की गई और उनकी जगह पर कमल पटेल और जगदीश देवड़ा जैसे लोगों को तवज्जो देकर मंत्री बनाया गया यह अलग बात है कि भाजपा सबसे अलग पार्टी होने का दावा करने वाली और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने वाली सरकार में मंत्री जो खेल खेल रहे हैं वही शिवराज के चहेते हैं चाहे वह जगीदश देवड़ा हों या कमल पटेल हों कमल पटेल जैसे नेता मुख्यमंत्री के चहेते हैं तो वहीं गौरीशंकर बिसेन जैसे नेता जो कि यह दावा करते हैं कि करोड़ रुपये देकर वह केंद्र में कृषि राज्यमंत्री का दर्जा तो पा ही लूंगा ऐसे नेता और राज्य के भ्रष्ट अधिकारी शिवराज की पहली पसंद रहे हैं यही नहीं जिसका परिणाम भाजपा को २०१८ के विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ा था लेकिन उसके बाद भी शिवराज ने उस हार के बाद कोई सबक नहीं लिया और फिर भी अपने मंत्रिमण्डल में देवड़ा जैसे जो कि अपने ही क्षेत्र के मतदाताओं के जहरीली शराब से मौत हो जाने के बाद उस शराब कारोबारी जिसकी जहरीली शराब पीने से जगदीश देवड़ा के क्षेत्र के १४ मतदाताओं की मौत हुई थी उसके बेटे से सोने की चेन धारण करने में उन्हें जरा भी शर्म नहीं आती यही नहीं देवड़ा अपनी पार्टी की वह कलाकारी से अपने जिले के प्रभारी मंत्री को कराते हैं जो सिंधिया के साथ भाजपा में आए हैं यही वजह है कि शिवराज सिंह के अहंकारी नीति के चलते अब चुनावी बेला में भाजपा में भूचाल आ गया तब इनकी नींद जागी और जिन नेताओं के खतों को डस्टबिन में डाल दिया करते थे आज उन्हीं नेताओं को मनाने में लगे हुए हैं यह सभी जानते हैं कि भाजपा के संस्थापकों में रहे संत पुरुष कैलाश जोशी जैसे नेता के साथ भाजपा ने कैसा व्यवहार नहीं किया जब वह मुख्यमंत्री थे तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए मुरारजी देसाई से लेकर मामा बालेश्वर व इंदौर के समाजवादी चिंतक मोहन ढाकोनिया जैसे लोग उनके पक्ष में माहौल बना रहे थे तो वहीं भाजपा के चतुर चालाक और करोड़ों का चंदा खाने वाले नेता कैलाश जोशी को नींद की बीमारी का बहाना बनाकर मुख्यमंत्री पद से हटाने में लगे हुए थे आज वर्षों बाद उन्हीं के पुत्र दीपक जोशी को जो कि मालवा के इकलौते ब्राह्मण नेता हैं उन्हें पार्टी छोडऩे के लिये मजबूर कर रहे हैं इस माहौल से पीडि़त होकर पार्टी के जनसंघ के जमाने के नेता सत्यनारायण सत्तन ने मुख्यमंत्री को खरी-खरी सुना दी तो वहीं पूर्व विधायक भंवरसिंह शेखावत ने भी पार्टी पर विरोधी तीर चला दिये साथ ही यह साफ कर दिया कि मैं चुनाव लड़ूंगा यह पार्टी को तय करना है नहीं हुआ तो मैं अपना अगला कदम मैं तय करूंगा सत्तन ने मीडिया से कहा कि पार्टी का रुख पुरातन नेताओं की अवहेलना करने वाला हो गया है अभी दो जा रहे हैं १०० भी जायेंगे पार्टी छोड़कर जिन्होंने पार्टी को लेकर जीवन दिया उन्हें कुछ नहीं मिला बल्कि जिन्होंने कांग्रेस में ७० साल तक गालियां दीं उनका राजतिलक किया जा रहा है पुराने नेताओं को मनाने की बात को लेकर कहते हैं कि कोई फर्क नहीं पड़ता उन्हें कोई नहीं मनायेगा वह कहते हैं कि संगठन के सारे फैसले कुछ लोग लेंगे तो यही होगा अनुभव को नकारकर केवल उम्र की बात की जा रही है तो अब इस उम्र की दहलीज पर पीएम भी खड़े हुए हैं जनसंघ के जमाने के नेता सत्तन ने एबीवीपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां से आये लोगों को रेवड़ी बांटने का खेल चल रहा है सत्तन ने कहा कि इन सभी ने जेल नहीं देखी वह जनसंघ नहीं जानते जेल नहीं गये यह सब हमने सहा तो वहीं शेखावत इंदौर की विधानसभा पांच व धार जिले के बदनावर से विधायक रह चुके हैं उन्होंने कहा अभी तक फैसला नहीं लिया कांग्रेस से चर्चा हो रही है लेकिन पार्टी को बता दिया कि मेरा इंदौर चला गया और बदनावर भी बया मुझे कहीं और से चुनाव लड़ाया जाये देपालपुर या बडऩगर दोनों ही राजपूत बाहुल्य क्षेत्र हैं और दोनों ही भाजपा की सीटें हैं तो वहीं देपालपुर से मनोज पटेल की इस बार स्थिति ठीक नहीं है वह बोले यह तो निष्पक्ष बात है कि पार्टी से पहले हमें बताना चाहिये वह कर दी है ताकि कोई यह नहीं कह सके कि कोई ने हमें बताया ही नहीं जहां कांग्रेस के लोग भाजपा में आये हैं वह सभी संकट में आ गये हैं दीपक जोशी की बात करें तो सांवेर में प्रवास की बात हो या ग्वालियर में उनके पुराने नेताओं शेजवार की बात हो या पुराने नेता जिन्होंने लड़ाई लड़ी है और पार्टी खड़ी की है उन्हें दरकिनार कर घर बैठा दिया अब भाजपा में कांग्रेस से आये लोग लीडर बन गये जनसंघ के जमाने के भाजपा नेता शेखावत बोले भाजपा में अहंकार आ गया है कार्यकर्ताओं की पहचान नहीं रही यही अहंकार २०१८ के विधानसभा चुनाव में ले डूबेगा और यही स्थिति रही तो अब भी ले डूबेगा इन सब परिस्थितियों के चलते भाजपा के संत पुरुष पूर्व सीएम कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी को मनाने के लिए भाजपा प्रयास करने में लगी हुई है उनसे भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने मुलाकात की लेकिन मुलाकात के बाद भी दीपक जोशी नहीं मान रहे हैं वह भाजपा छोडऩे के अपने फैसले पर अडिग हैं वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने यह दावा किया कि दीपक जोशी पार्टी नहीं छोड़ेंगे हम उन्हें मना लेंगे मजे की बात तो यह है कि भाजपा के संत पुरुष पूर्व सीएम कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी अभी एक कार्यकर्ता की हैसियत से भाजपा में कार्य कर रहे हैं तो वहीं इसी भाजपा में करोड़ों का चंदा खा चुके नेता के पुत्र मंत्री पद पर आसीन हैं उनकी कार्यशैली कैसी है इससे भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भलीभांति परिचित हैं लेकिन फिर भी ऐसे नेताओं के बेटे को मंत्री पद से नवाजा जा रहा है वहीं संत पुरुष के बेटे की स्थिति यह है कि वह भाजपा छोडऩे को मजबूर हैं हालांकि दीपक जोशी ने दो दिन पूर्व रात को अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया था उन्होंने अपने सामान को एक रिश्तेदार के घर में भेज दिया है इस स्थिति से यह साफ हो गया है कि वह भाजपा छोड़ेंगे कुल मिलाकर इस चुनावी वर्ष की पूर्व बेला पर शिवराज की गलत नीतियों के चलते भाजपा में जो भूचाल आया है वह कब जाकर थमेगा यह कहा नहीं जा सकता है वैसे इस भूचाल को देखकर भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज की अहंकारी और भ्रष्ट नीति व भ्रष्टाचारियों की नीति को दोषी ठहरा रहे हैं तो वहीं भाजपा के कुछ नेता यह भी कह रहे हैं कि शिवराज सिंह जिस व्यक्ति की सलाह पर चल रहे हैं वह व्यक्ति पहले ही छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार का बंटाढार करके आ गया और लोग उसके बारे में यह कह रहे हैं कि जहां जहां संतन के वहीं बंटाढार वही स्थिति उसी दिन से प्रदेश भाजपा की हो गई ह?
