
राजिम :- माघी पुन्नी मेला में महाशिवरात्रि स्नान के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर के साधु संत पहुंचे हुए थे इन्होंने शाही स्नान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान लिए लेकिन जब दक्षिणा की बारी आई तो बाहर से आए हुए साधु की ही पूछ परख होती रही और उन्हें बकायदा विभागीय अधिकारी पाठक जी ने दक्षिणा प्रदान किया। लेकिन स्थानीय स्तर के साधु-संतों को फूटी कौड़ी तक नहीं दिया गया यहां तक की उनके आने जाने का किराया तक नसीब नहीं हुआ। कल तक सभी साधु संत लोमस ऋषि आश्रम में ही जैसे-तैसे रात गुजारे। इनमें से कुछ साधु संत आज सुबह को ही इधर-उधर करके जुगाड़ के और चले गए। इस प्रकार के दोमुही रवैया से साधु संत सरकार के कार्यों के प्रति रोष प्रकट किए हैं। उल्लेखनीय है कि 5 फरवरी से 18 फरवरी तक प्रदेश सरकार की देखरेख में एवं उनके पूरे आयोजन में साधु संतों ने भी भाग लिया वैसे सन् 2005 से यहां कुंभ पर्व की नींव डाली जा चुकी है। तब से लेकर पेशवाई तथा महाशिवरात्रि को शाही स्नान का आयोजन किया जाता है जिसमें साधु संत उपस्थित होते हैं हालांकि 2018 के बाद से कुंभ पर्व नहीं हो रहे हैं मात्र माघी पुन्नी मेला का आयोजन किया जा रहा है फिर भी साधु-संतों को स्नान यहां होता है सरकार द्वारा बकायदा स्नान कुंड बनाए जाते हैं दक्षिणा भी दिया जाता है परंतु इस बार स्थानी साधुओं को कोई तवज्जो नहीं दिया गया जिससे साधु संत बहुत रूष्ट हो गए हैं।
