शाला त्यागी एवं विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े – कलेक्टर
महासमुंद – जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा, महासमुंद के तत्वावधान में जिले के 184 संकुल समन्वयकों एवं बीआरसीसी का जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में ‘लइका चिन्हारी ऐप’ के माध्यम से शाला त्यागी एवं विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने कहा कि संकुल समन्वयक अपने-अपने संकुल के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों के भवनों की स्थिति का गंभीरता से निरीक्षण करें। जहां भवन मरम्मत अथवा अतिरिक्त कक्ष की आवश्यकता हो, वहां तत्काल प्रस्ताव प्रस्तुत करें। इसी प्रकार जिन विद्यालयों में शौचालय की आवश्यकता है, उनके लिए भी प्रस्ताव तैयार करें। उन्होंने कहा कि तिमाही परीक्षा के उपरांत सभी कक्षाओं के परीक्षा परिणामों की समीक्षा की जाए तथा कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को उपचारात्मक शिक्षण (रेमेडियल टीचिंग) के माध्यम से उनकी कमियों को दूर करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। विद्यालयों में बच्चों एवं शिक्षकों की नियमित उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाए। शिक्षक बच्चों के रोल मॉडल होते हैं, इसलिए विद्यालय में शिक्षकों को अपनी गरिमा, आचरण एवं मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
कलेक्टर ने अपार आईडी से वंचित विद्यार्थियों के लिए विशेष अभियान चलाने, बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने में सहयोग करने तथा प्रत्येक विद्यालय में किचन गार्डन विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मोबाइल का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई-लिखाई एवं विषयों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए किया जाना चाहिए।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री बी.एल. देवांगन ने कहा कि शाला त्यागी एवं विद्यालय से बाहर बच्चों का चिन्हांकन कर उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना हम सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। संकुल समन्वयक विद्यालयों की सकारात्मक एवं प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें।
डीएमसी श्री रेखराज शर्मा ने कहा कि यदि संकुल समन्वयक दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करें तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं है। उन्होंने ‘लइका चिन्हारी ऐप’ का सही एवं शत-प्रतिशत उपयोग करने पर जोर देते हुए कहा कि चिन्हांकित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गंभीर प्रयास किए जाएं। हमारा प्रयास होना चाहिए कि कोई भी बच्चा ड्रॉपआउट न हो। प्रत्येक बच्चा हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
प्रशिक्षण के सेक्शन प्रभारी एपीसी श्री अजय भोई ने सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने की बात कही। वहीं मास्टर ट्रेनर श्री सुबोध तिवारी ने ऐप डाउनलोड करने से लेकर सर्वे की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर एपीसी धनवंतरी सिन्हा, भोजराम मिर्धा, बीआरसीसी श्री जागेश्वर सिन्हा, अनिल साव, श्री मनोज चक्रधारी सहित जिले के सभी संकुल समन्वयक उपस्थित रहे।
