रायपुर – प्रदेश में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को धान सहित अन्य खरीफ फसलों की सुरक्षा एवं बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक कृषि कार्य समय पर करने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि अत्यधिक वर्षा से खेतों में जलभराव होने पर फसलों को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए उचित जल निकासी की व्यवस्था करना आवश्यक है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की फसल में पानी लंबे समय तक भरा रहने से जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है। ऐसे में खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करें।
बारिश के मौसम में धान की फसल में झुलसा, पत्ती धब्बा एवं अन्य फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। किसान नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें और रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग के विशेषज्ञों से सलाह लेकर अनुशंसित दवाओं का ही प्रयोग करें।
सोयाबीन, मक्का, अरहर एवं अन्य खरीफ फसलों में भी खरपतवार नियंत्रण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा कीटों की निगरानी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। तेज बारिश के दौरान रासायनिक दवाओं का छिड़काव नहीं करने और मौसम साफ होने पर ही कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी समस्या की स्थिति में अपने निकटतम कृषि विस्तार अधिकारी या कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क कर वैज्ञानिक सलाह प्राप्त करें।
मुख्य सुझाव
खेतों में जलभराव न होने दें।
फसलों का नियमित निरीक्षण करें।
रोग या कीट दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें।
मौसम साफ होने पर ही दवाओं का छिड़काव करें।
संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें।
