रायपुर – राजधानी रायपुर के ग्रामीण अंचलों में पर्यावरण को ताक पर रखकर कीमती लकड़ियों की तस्करी का काला खेल जारी है। ताजा मामला /आरंग ब्लॉक के ग्राम तोरला से सामने आया है, जहाँ एक आरा मिल में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।प्रतिबंधित पेड़ों की अवैध कटाईस्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी और साक्ष्यों के अनुसार, ग्राम तोरला में आशुतोष शुक्ला नामक व्यक्ति द्वारा संचालित आरा मिल में बड़े पैमाने पर अवैध काम किया जा रहा है। यहाँ अर्जुन और कौहा जैसी संरक्षित प्रजातियों के पेड़ों को अवैध रूप से काटकर खपाया जा रहा है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ शासन के नियमानुसार इन पेड़ों को काटने के लिए राजस्व और वन विभाग से विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है, लेकिन यहाँ बिना किसी वैध दस्तावेज के रात-दिन कटाई का खेल चल रहा है।तस्वीरें बयां कर रही हैं हकीकतमौके से प्राप्त तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि आरा मिल परिसर में लकड़ियों के विशाल लट्ठे (Logs) और चिराई किए हुए पट्टे भारी मात्रा में डंप किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मिल संचालक द्वारा आसपास के जंगलों और निजी जमीनों से अवैध रूप से पेड़ कटवाकर यहाँ लाए जाते हैं। अवैध कटाई के इस कारोबार से शासन को लाखों रुपये के राजस्व की हानि भी हो रही है।मिलीभगत की आशंकाइतने बड़े पैमाने पर अवैध आरा मिल का संचालन और कीमती लकड़ियों की तस्करी बिना प्रशासनिक संरक्षण के मुमकिन नहीं लगती। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या स्थानीय वन अमला और राजस्व विभाग इस गंभीर मामले से अनजान है या जानकर भी अनजान बना हुआ है? तोरला गांव में खुलेआम चल रहा यह काम शासन के “हरियर छत्तीसगढ़” के संकल्प को भी चुनौती दे रहा है।प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांगक्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने रायपुर कलेक्टर और डीएफओ (DFO) से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि:आरा मिल के लाइसेंस की सत्यता की जांच की जाए।मौके पर मौजूद लकड़ी के स्टॉक का मिलान कागजों से किया जाए।अवैध कटाई में शामिल संचालक आशुतोष शुक्ला और उसके सहयोगियों पर भारतीय वन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।यदि प्रशासन समय रहते नहीं जागा, तो क्षेत्र से अर्जुन और कौहा जैसे औषधीय महत्व के पेड़ पूरी तरह विलुप्त हो जाएंगे।
