जिले में वृहद पुल निर्माण से बन रहे विकास एवं समृद्धि के सेतु, पिछले दो वर्षों में इलिनोइस और पुल-पुलियों का जाल

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पूर्वी एशिया में पुल एवं सड़क निर्माण से माओवाद सीमेंट का कार्य हुआ आसान

लगभग 100 गांव की 80 हजार आबादी का संपर्क तहसील व जिला मुख्यालय से

 कांकेर – जिले में अब विकास और समृद्धि के द्वार लगे हुए हैं। शासन की ओर से बड़े पैमाने पर सड़क एवं पुल-पुलियों के निर्माण में उद्यम को उद्यम मिला है। इससे एक ओर सड़क संपर्क आसान हुआ है, वहीं माओवाद को हतोत्साहित करते हुए उसके उद्यम की दिशा में सार्थक प्रयास हो रहे हैं। पिछले दो वर्षों में सेतु निर्माण के अंतर्गत आकांक्षी जिला कांकेर में सेतुओं की तेजी से पूर्ण निर्माण हो रहा है, ने जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्र में निवासरत आम जनजीवन के विकास और समृद्धि की दिशा में सेतु का कार्य किया है।

रजिस्ट्रार  नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 15 कार्य लागत रु. 61.50 करोड़ के पूरे हैं। इन पुलों का निर्माण हो जाने से जिलों में माओवाद के रोजगार में तेजी आई है और प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज हुई है। उन्होंने बताया कि इस दौरान आतुरबेड़ा-भैसगांव-निन्ना मार्ग में दृढकी नदी पर महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय पुल निर्माण कार्य पूरा किया गया है। इन पुलों का निर्माण जिले के लगभग 100 गांवों की 80 हजार आबादी का समेकित संपर्क ब्लॉक, तहसील एवं जिला मुख्यालय से किया गया है। इसके निर्माण से क्षेत्रवासियों तक उच्च शिक्षा, व्यापार, पर्यटन, सामाजिक संपर्क, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और शासन की मंजूरी की जन-जन तक पहुंच आसान हो गई है।

इसी प्रकार कांकेर जिले के क्षेत्र, ग्रामों और ग्रामवासियों के कोने-कोने से राज्य की जनसंख्या, राष्ट्रीय राजमार्ग, झील, तहसील और जिला मुख्यालय से संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से शासन द्वारा पिछले दो दशकों में 09 नए वृहद पुल की लागत 85 करोड़ की स्थापना की गई है। कार्यपालन आर्किटेक्ट सेतु निर्माण श्री राघ्यंद्र सोनकर ने बताया कि इन आश्रमों में बासनवाढ़ी-तन्हाकापार मार्ग पर महानदी पर लागत 28 करोड़ है, जिसमें क्षेत्र के बाकी हिस्सों की सुविधा और पर्यटन विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसी तरह सोनपुर-मरोदा मार्ग के.मी. 78/10 (बेचाघाट) पर 15 करोड़ 50 लाख की कुल लागत कोटरी नदी पर पुल निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस पुल के पूर्ण हो जाने से माओवाद प्रभावित माड़ क्षेत्र का सीधा संपर्क होगा। उक्त पुल माओवाद यूएसए एवं क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इनमें से एक बनने से जिले के सुदूरवर्ती सुदूरवर्ती ग्रामों में निवासरत अवशेषों को एवं प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।