फाइलेरिया जन्मजात या अनुवांशिक नहीं है

फिंगेश्वर :– फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिजली में नवमी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को प्रीति तुमानिया ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक पल्लवी सोनी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी मितानिन भानू साहू एवं कृषि मित्र सुमित्रा पटेल की उपस्थिति में दवाई खिलाई गई. फाइलेरिया के संदर्भ में जानकारी देते हुए संस्था के वरिष्ठ व्याख्याता पूरन लाल साहू ने बताया कि भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 2027 तक फाइलेरिया (हाथीपाँव) को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है. फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है. मच्छर जब संक्रमित व्यक्ति को काटकर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो माइक्रोफाइलेरिया के परजीवी ब्लड सेल्स के माध्यम से स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर उसे फाइलेरिया रोगी बना देता है और धीरे-धीरे अपंगता को बढ़ाता है. फाइलेरिया से बचाव का एकमात्र कारगर उपाय नियमित और सही तरीके से दवा का सेवन है. उन्होंने आगे स्वच्छता के संदर्भ में कहा कि गंदा पानी में मच्छर पनपता है. इसलिए घर के आसपास साफ सफाई रखते हुए गंदा पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें. इस अवसर पर व्याख्याता दिनेश कुमार साहू,पूरन लाल साहू, विनय कुमार साहू,नरेंद्र कुमार वर्मा, योगेश सोनकर,रेखा सोनी, संतोषी गिलहरे, नकुल राम साहू,क्लर्क दुष्यंत साहू व छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.