महासमुंद – पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी के तहत ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराए जाने की दिशा में सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के साथ-साथ महासमंुद जिले में भी भाजपा की सरकार आने के बाद से मजदूरों की संजीवनी कही जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मृतप्राय होती जा रही है। पूरे जिले में किसी भी पंचायत में इस योजना के तहत कार्य प्रारंभ नहीं है, आैर ना ही कार्यों की स्वीकृति दी जा रही है। जबकि यह निम्न तबके के लोगों की जीविका का सहारा है। कार्य स्वीकृत एवं प्रारंभ न होने की स्थिति में जिले से बहुतायत रूप में मजदूरों का पलायन अन्य प्रदेशों में हो रहा है।पूर्व संसदीय सचिव श्री चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद पिछले वर्ष भी जिला महासमुंद को उक्त योजना के अंतर्गत मानव दिवस मजदूरी का जो लक्ष्य दिया गया था, अधिकारियों की लापरवाही व उदासीनता के चलते आधा लक्ष्य भी पूर्ण नहीं हो पाया है। जिला महासमुन्द में कुल पंजीकृत मनरेगा जॉबकार्ड 1,66,906 है, जिसमें सक्रिय जॉब कार्ड 1,40,383 हैं। जिन्हें एक वित्तीय वर्ष में योजना अंतर्गत 100 दिवस एवं छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 50 दिवस मजदूरी कुल 150 दिवस मजदूरी एक जॉबकार्ड में दिया जाना है। मनरेगा योजनांतर्गत मजदूरी दर भी पूर्व में 243 रूपये प्रतिदिन थी, अब वर्तमान में 261 रूपये का मजदूरी भूगतान प्रतिदिन के दर से किया जाना है। जिले को उक्त योजना अंतर्गत कहने के लिये तो 8 करोड़ मानव दिवस का लक्ष्य दिया गया है, लेकिन अभी तक इस योजना में किसी भी पंचायत से न ही प्रस्ताव मंगाया जा रहा है, न ही इस संबंध में कोई जानकारी पंचायतों को दी जा रही है। वस्तुतः इस योजना से ग्रामों में मूलभूत कार्य आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। लेकिन दुर्भाग्य है, कि महासमुन्द जिले में अभी तक कार्य प्रारंभ नहीं किये जा रहे हैं, लक्ष्य की पूर्ति होना संभव ही नहीं है। परिणाम स्वरूप मजदूर योजना का लाभ लेने से वंचित हो रहे हैं।श्री चंद्राकर ने आगे कहा कि कई पंचायतों में रोजगार सहायक एवं सरपंच द्वारा निष्क्रिय जॉबकार्ड एवं जो कभी काम में नहीं गये आर्थिक रूप से सक्षम जॉबकार्ड धारियों के नाम पर फर्जी मस्टररोल तैयार कर राशि का आहरण किया गया है। इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। अधिकारियों को इस तरह की शिकायतों से अवगत कराने के बावजूद भी किसी तरह की कार्यवाही संबंधित विभाग द्वारा नहीं की जा रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यह एक योजना ही नहीं अधिनियम भी है, इस अधिनियम का पालन संबंधित विभाग के अधिकारी नहीं कर रहे हैं। यही कारण है, कि जिले को दिये गये लक्ष्य से बहुत पीछे रह जाता है। जिससे योजना का लाभ जिले के मजदूरों को नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश की भाजपा सरकार एवं जिले के अधिकारियों की उदासीनता से मजदूरों को कार्य की गारंटी से वंचित होने के साथ-साथ आर्थिक परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने तत्काल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अंतर्गत महासमुन्द जिले के सभी ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव मंगाकर अविलंब कार्य स्वीकृति एवं प्रारंभ कराने की मांग की गई है।
