माता पहुंचनी पर शीतला मंदिर में मेले का माहौल।

सैकड़ों लोगों ने शीतलता का प्रतीक ठंढई लिया समवेत शिखर संवाददाता।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद – स्थानीय शीतला मंदिर में माता पहुंचनी का पर्व मनाया गया। इस मौके पर नगरवासियों ने अपने व परिवार की कुशतला के लिए मां शीतला के दरबार में पहुंचकर यथायोग्य भेंट अर्पण किया और ठंढई प्राप्त कर अपने घरों में ठंढई का छिड़काव किया। नगरवासियों के लगातार पहुंचने के कारण शीतला मंदिर में मेले का माहौल हो गया था।मंदिर के बाहर नारियल, धूप, दीप व पूजन सामग्रियों के अलावा चाट-गुपचुप जैसे खोमचे वाले भी काफी संख्या में अपनी दुकाने सजा रखे थे। दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालु पूजन सामग्री खरीदने के साथ ही वापसी में चाट गुपचुप का आनंद उठाते रहे। मंदिर के बाहर माता सेवा के लिए जस गीत की टोली लगातार मांदर की थाप पर भजन गाते रहे। दर्शनार्थियों का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। सुबह 5 बजे मंगला आरती के बाद मां शीतला मंदिर के पट खोल दिए गए थे। आमतौर पर जिन घरों में छोटी माता, सेंद्ररी या गलवा माता का प्रकोप रहता है वे यहां पहुंचकर मां शीतला को प्रसन्न करने के लिए विधिविधान से पूजा अर्चन कर हल्दी पानी से बने ठंढई को शीतला मंदिर में मौजूद कार्यकर्ताओं पर नीम के पत्ते से छिड़काव करते है। इस दौरान लगातार मां शीतला के जयकारे मंदिर परिसर मे लगते रहे। दर्शन पूजन व ठंढई लेने शाम पौने 5 बजे विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा अपने परिवार समेत पहुंचे व मां शीतला को चुनरी व अन्य भेंट सामग्री अर्पण कर क्षेत्र की कुशलता के लिए प्रार्थना की।इस मौके पर भाजपा नेता संदीप दीवान, रमेश साहू, मुन्ना साहू, मंगेश आदि मौजूद थे। टांकसाले उल्लेखनीय है कि आषाढ़ माह में गुरूवार या सोमवार को छग के प्रायः सभी गांवों में माता पहुंचनी का पर्व मनाया जाता है। जिसके चलते 11 जुलाई को ग्राम खरोरा, परसदा समेत अनेक गांवों में माता पहुंचनी का पर्व मनाया गया।