मेडिकल कालेज प्रबंधन अब तक नहीं ढूंढ पाया एक टेक्नीशियन, मरीज हो रहे बेहाल।

जिला अस्पताल की एक्स-रे मशीन खुद बीमार।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद – जिला चिकित्सालय अपग्रेड होकर मेडिकल कालेज हास्पिटल हो गया, सालभर से मेडिकल छात्रों की पढ़ाई शुरू हो गया। पहले से अधिक स्टाफ बढ़ गए, बेहतर मशीन आ गई, सुविधा बढाने प्रशासन हर संभव कार्य कर रहा है, लेकिन जिला अस्पताल को बेहतर ढंग से चला पाने का काम भी जिम्मेदारों से नहीं हो रहा है।जिला अस्पताल में पखवाड़े भर से एक्सरे मशीन का प्रिंटर खराब है। प्रिंटर खराब होने से ज्यादातर मरीजों को यहां से लौटा दिया जा रहा है। वहीं जब कोई मरीज सूझबूझ दिखाए, मोबाइल पर फोटो चिकित्सक को दिखा सकें। यह अव्यवस्था बीते कुछ दिनों से जारी है, इसका नाजायज लाभ निजी ले रहे हैं, जबकि गरीब एक्सरे सेंटयाहरे खर्च करना पड़ रहा है। मरीजों को बाहराने में मेडिकल कालेज प्रिंटर ठीक कराने में अबतक एक टेक्नीशियन नहीं ढूंढ पाया। मशीन का मेंटेनेंस यदि प्रदाता कंपनी की जिम्मेदारी में है तो यह काम भी उससे नहीं लिया जा रहा है।एक्स-रे मशीन की खराबी, के अलावा यह अल्ट्रासाउंड और लिथोट्रिप्सी मशीन में भी तकनीकी दिक्कतें हैं, जिससे मरीजो का स्वास्थ्य हित नहीं रहा है।

पखवाड़े भर से खराब प्रिंटर को सुधारवाने नहीं दिखा रहे तत्परता – मोबाइल से फोटो लेकर चला रहे है काम एक्सरे मशीन ठीक है, इसके प्रिंटर में तकनीकी गड़बड़ी है, इसलिए प्रिट ‘नहीं हो रहा है, मोबाइल से फोटो लेकर फिलहाल काम लिया जा रहा है। नयापारा के मरीज अमजद ने बताया कि उसके पैर में सूजन है, हड्डी फेक्चर होने का अंदेशा है। चिकित्सक को दिखाया तो एक्सरे कराने कहा गया। लेकिन मशीन खराब बताया  जिससे एक्सरे जिला अस्पताल में नहीं हो सका।