सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पर सोलर प्लेट लगाने के नाम पर निकाली राशि,मौके पर कुछ भी नही। दस-दस हजार में बिकने वाला पाइप लगाकर पंचायत ने निकाले लाखो के बिल । ग्राम पंचायत पनावार में सरपंच सचिव कर रहे जमकर भ्रस्टाचार

 

सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पर सोलर प्लेट लगाने के नाम पर निकाली राशि,मौके पर कुछ भी नही।
दस-दस हजार में बिकने वाला पाइप लगाकर पंचायत ने निकाले लाखो के बिल ।
ग्राम पंचायत पनावार में सरपंच सचिव कर रहे जमकर भ्रस्टाचार

पखांजूर से बिप्लब कुण्डू-

पखांजूर;- खुले में चराई की रोकथाम व सड़कों व शहरों में जहां-तहां आवारा घूमते पशुओं के प्रबंधन व पर्यावरण की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ राज्य मेें गोधन न्याय योजना शुरू करने का ऐलान किया है। सरकार की योजना से गौ-पालन और गोबर प्रबंधन से पशुपालकों को लाभ दिलाने और गांव में रोजगार व अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ड्रीम प्रोजेक्ट नरुआ गरुआ घुरवा बाड़ी के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में गोठान का निर्माण किया है।लेकिन सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में भी भ्रस्टाचार करने में ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव कोई कसर नही छोड़ रहे है।
मामला कोयलीबेड़ा ब्लॉक के ग्राम पंचायत पनावार का है।जहां गोठान का निर्माण किया जाना है ।और गोठान में बिजली की व्यवस्था के लिए सोलर प्लेट लगाने के नाम पर 5 मार्च 2021 को पँचायत के खाते से 25 हजार रुपए आहरण कर लिया गया ।लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी गोठान परिसर में सोलर प्लेट का नमो निसान नजर नही आ रहा है।गौरतलब है कि बिना काम कराए पँचायत से राशि का आहरण करना इस पँचायत का कोई पहला मामला नही है।इसके पहले भी भ्रस्टाचार से जुड़े ऐसे मामले है जिसमे पंचायत से राशि का आहरण कर लिया गया है और मौके पर काम शून्य है।
गौरतलब है कि अंदरूनी इलाका और पहुंचविहीन क्षेत्र के नाम से पहचाने जाने वाले ग्राम पंचायत पनावार में भ्रस्टाचार का मामला थमने का नाम नही ले रहा है।दरसल जिले के अंतिम छोर में बसा यह पँचायत में कोई अधिकारी अंदरूनी इलाका के दहसत के वजह से मानिटरिंग करने नही जा पाता।जिसका भरपूर फायदा पँचायत के सरपंच सचिव द्वारा उठाया जा रहा है।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत पनावार में पिछले वर्ष विभिन्न जगहों पर पाइप डालकर 45874 रुपये का बिल आहरण करवा लिया गया है।ऐसे दो दर्जनों बिल पँचायत के खाते से आहरण हुए है।जबकि बाजार में उक्त पाइप की कीमत आठ से दस हजार रुपये है।लेकिन पँचायत के खाते से सरपंच सचिव ने मिलीभगत कर 45874 रुपये आहरण कर लिया है जो कि जांच का विषय है।

जिम्मेदार अफसरों की कार्यप्रणाली सन्देहास्पद—सबसे अहम बात यह कि अंदरूनी इलाका होने के चलते जिम्मेदार अधिकारी मानिटरिंग करने नही जाते।सरपंच सचिव जो फाइल बनाकर ले आते है जिम्मेदार अपना दस्तखत कर राशि को आहरण करवा कर अपने जिम्मेदारियो से पल्ला झाड़ लेते है।यदि कायदे से स्थल निरीक्षण और मौके पर पहुंचकर मानिटरिंग किया जाता तो इस तरह भ्रस्टाचार के मामले नही पनपते।

फर्नीचर घोटाले की भी चल रही है जांच—गौरतलब है कि उक्त पंचायत के सरपंच सचिव पर फर्नीचर घोटाले का भी आरोप है।जिसकी शिकायत पखांजुर अनुविभागीय अधिकारी से की गई है।लेकिन पखांजुर प्रशासन की निष्क्रियता के चलते अबतक भ्रस्टाचार के मामले में क्या कार्रवाही हो सकी है यह स्पस्ट नही हो पाया है।दो साल पूर्व हुए शिकायत के अनुसार पनावार पँचायत से फर्नीचर खरीदी के नाम से 71 हजार रुपये की राशि आहरण हुई है।जबकि पँचायत में फर्नीचर का नामोनिशान नही।इसके बावजूद जांच दल भी सिर्फ खानापूर्ति कर के बैरंग लौट गई थी और अब जांच होने के महीने भर होने के बावजूद पखांजुर अनुविभागीय कार्यालय से उक्त मामले में कार्रवाही को लेकर कुछ स्पस्ट नही हो सका है।यह समझ से परे है कि भ्रस्टाचार से जुड़े मामले को लेकर पखांजुर प्रशासन गंभीर क्यों नही है।
बताना लाजमी होगा कि भ्रस्टाचार से जुड़े मामले में प्रशासन अगर इस तरह लेटलतीफी करते रहे और दो साल बीतने के बावजूद भी कार्रवाही का अतापता न हो तो भरस्टाचारिओ के हौसलें का बढ़ना लाजमी है।

आशीष डे, जनपद पंचायत सीईओ कोयलीबेड़ा— मामले की जांच करवाता हूं।पाइप पुलिया की तश्वीर देखकर नही लग रहा कि स्टिमेन्ट के अनुसार निर्माण हुआ है।फिर भी जांच के बाद ही स्पस्ट हो पायेगा ।दोषी पाए जाने पर निश्चित कार्रवाही की जाएगी।
01 रास्ते मे डाला गया पाइप
02 गोठान में सोलर लाइट का नामो निशान नही ।